किसान बोले- मजबूरी में खरीद रहे हैं
खाद के लिए मजबूरन दुकानों का रुख करना पड़ रहा है। मौजूदा समय डीएपी की जरूरत है। समितियों से मिलने वाली खाद की विश्वसनीयता को लेकर जहां किसान आश्वास्त रहते हैं। वहीं बाहर मिलने वाली खाद में मिलावट का भी उन्हें शक रहता है, मगर मजबूरी में खरीद रहे हैं।
एनपीके खाद की बोरी 1350 रुपये की है
समिति में मिलने वाली डीएपी व एनपीके खाद की बोरी 1350 रुपये की है, जबकि दुकानों में डीएपी 1800 रुपये की है। वहीं, उस क्वॉलिटी की एनपीके मिल ही नहीं रही है। जो मिल रही हैं वह काफी महंगी हैं। सरगांव के बलजीत सिंह यादव, रैपुरा के विनोद सचान, घुरऊपुर के राम स्वरूप आदि किसानों ने बताया कि खेत तैयार हैं। विश्वसनीय न होने के बावजूद दुकानों से महंगी खाद खरीदने की मजबूरी है।