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Kanpur: ऑनलाइन लॉटरी खिलाने के आरोपी भाइयों को एसटीएफ ने किया गिरफ्तार

Tue, 07 Oct 2025 11:43 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

गिरोह के सदस्य कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, चंदौली, जौनपुर में सक्रिय हैं। बाकी की तलाश तेज कर दी गई है। आरोपी शून्य से नौ नंबर तक का टिकट जारी करते थे। 
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आरोपी किशन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एसटीएफ ने मंगलवार को किदवईनगर से ऑनलाइन लॉटरी खिलवाने वाले दो भाइयों को गिरफ्तार किया है। दोनों वेबसाइट के माध्यम से शून्य से नौ नंबर तक का टिकट जारी करते थे। इसी के माध्यम से लॉटरी लिखवाई जा रही थी। पुलिस ने उनके पास से कई मोबाइल, लैपटॉप, आधारकार्ड, पैनकार्ड और अन्य कूटरचित दस्तावेज बरामद किए हैं। आरोपियों का नेटवर्क कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, चंदौली, जौनपुर तक फैला है। एसटीएफ गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है। एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक विशाल विक्रम सिंह ने बताया कि कई शहरों में वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन लॉटरी खिलाने की सूचनाएं आ रहीं थीं। टीमों को सक्रिय किया गया जिसमें किदवईनगर क्षेत्र से https://playbhagyalaxmi.net.in/ वेबसाइट के ऑपरेट होने का पता चला। इस आधार पर किदवईनगर से रजत केसरी और उसके भाई किशन केसरी को गिरफ्तार किया।
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दोनों मूलरूप से वाराणसी के मडुवाडीह के लहरतारा रहने वाले हैं। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि दोनों कानपुर में नौकरी करने के बाद 2022 में मौसा महेंद्र केसर के पास पुणे चले गए। यहां वेबट्रान टेक्नालॉजी प्रा.लि. के निदेशक रजनीश कुमार दुबे से वेबसाइट बनवाई। उसी के माध्यम से ऑनलाइन गेमिंग और लाटरी का काम करने लगे। अलग-अलग जगहों पर काउंटर बनवाए।

 
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आरोपी रजत - फोटो : अमर उजाला
जीतने पर 10 गुना धन का देते थे लालच
पुलिस के अनुसार जीतने पर 10 गुना धन देने का लालच दिया जाता था। खेल में व्हाट्सएप के माध्यम से शून्य से नौ नंबर तक के टिकट बुक किए जाते हैं। काउंटर चलाने वाले उन नंबरों को अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुप पर भेजते हैं। इसके बाद thefun.co.in पर डेटा फीड कर दिया जाता है। करीब 20 मिनट बाद जिस नंबर का टिकट सबसे कम खरीदा गया होता है साफ्टवेयर के माध्यम से https://playbhagyalaxmi.net.in/ वेबसाइट पर वही नंबर का रिजल्ट प्रकाशित होता है। इस खेल के लिए कूटरचित दस्तावेज बना सिमकार्ड का इस्तेमाल हो रहा है। महेंद्र केसरी के कहने पर ही कई फर्म बनाई गईं हैं। इन्हीं के नाम से बैंक खाते खोले गए। इनमें ठगी से आने वाले रुपयों का लेनदेन होता है। गिरोह में महेन्द्र केसरी, संदीप कटारिया, शिवम केसरी, सत्यम केसरी, संदीप पाठक शामिल हैं। आरोपी भाइयों को मंगलवार को जेल भेज दिया गया।
 
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