तीन डॉक्टरों को नगर निगम से संबद्ध किया गया
वर्तमान में चाचा नेहरू अस्पताल, जागेश्वर अस्पताल, बीएन भल्ला अस्पताल, बिरहाना रोड स्थित जच्चा-बच्चा अस्पताल, रायपुरवा स्थित जच्चा-बच्चा अस्पताल, खलासी लाइन औषधालय सहित अन्य अस्पताल बंद हैं। चाचा नेहरू अस्पताल और जागेश्वर अस्पताल में स्वैच्छिक रूप से कुछ डॉक्टर कभी-कभी आते हैं। टीकाकरण होता है, पर नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, ड्रेसिंग तक की सुविधा न होने के कारण मरीजों ने वहां जाना बंद कर दिया। वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से तीन डॉक्टरों को नगर निगम से संबद्ध किया गया है। तीनों नगर स्वास्थ्य अधिकारी के रूप में दो-दो जोनों में साफ-सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
न्यूनतम शुल्क पर या निशुल्क इलाज होगा
अब नगर निगम ने 150 करोड़ के म्युनिसिपल बांड और चिकित्सा क्षेत्र से संबंधित बड़े ग्रुप के माध्यम से पीपीपी मॉडल पर अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में पहले एक अस्पताल से शुरुआत की जाएगी, फिर अन्य अस्पताल खोले जाएंगे। सलाहकार की सर्वे रिपोर्ट के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल संचालित करने वाला ग्रुप कुछ मरीजों का न्यूनतम शुल्क पर या निशुल्क इलाज करेगा। अन्य से बाजार के शुल्क के हिसाब से इलाज का पैसा लिया जाएगा।
सीएम की घोषणा के बावजूद चाचा नेहरू अस्पताल शुरू करने का प्रस्ताव फाइलों में बंद
महापौर प्रमिला पांडेय की पहल पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन साल पहले चाचा नेहरू अस्पताल में चिकित्सा सुविधाएं शुरू कराने के निर्देश दिए थे। इसके मद्देनजर नगर निगम ने करीब 1.07 करोड़ रुपये खर्च कर इस अस्पताल की मरम्मत, रंगाई-पुताई कराई थी।
अभी तक अटकी है फाइल
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमित सिंह ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के तत्कालीन विभागाध्यक्ष डॉ. यशवंत राव आदि के साथ गहन मंत्रणा कर इस अस्पताल में चिकित्सा उपकरणों से लेकर डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टॉफ की तैनाती का खाका तैयार किया था। करीब तीन करोड़ के चिकित्सा उपकरण और दो करोड़ रुपये वेतन सहित अन्य खर्चों के लिए धन आवंटन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था पर अभी तक फाइल अटकी है।
150 करोड़ के म्युनिसिपल बांड से पीपीपी मॉडल पर चलेगा अस्पताल
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में शामिल नगर आयुक्त सुधीर कुमार ने बताया कि 150 करोड़ के म्युनिसिपल बांड से नगर निगम के बंद अस्पताल खोले जाएंगे। इन्हें पीपीपी मॉडल पर चलाया जाएगा। झांसी नगर निगम इस मॉडल पर 80 बेड का अस्पताल कैसे चालू कर रहा है, इसका भी अध्ययन किया जाएगा।