छात्र-छात्राएं (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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सॉल्वर गैंग के पर्दाफाश के बाद नीट जैसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। कई सॉल्वर ऐसे हैं जो काकादेव कोचिंग मंडी में वर्षों से कोचिंग कर रहे हैं लेकिन खुद परीक्षा पास नहीं कर सके। पैसों के लालच में वो सॉल्वर बन गए। पूरी डील व्हाट्सएप कॉल के जरिये होती थी। पुलिस को चैट भी मिली है जिसमें दस्तावेजों का आदान प्रदान हुआ है। पुलिस की रडार पर एक दो नामचीन डॉक्टर पर भी आ गए हैं। पुलिस बिहार समेत अन्य राज्यों जहां पर ऐसे गैंग पकड़े गए हैं, उनसे भी तार जोड़कर तहकीकात कर रही है।
बजरिया थाना के कार्यवाहक प्रभारी पंकज मिश्रा ने बताया कि राकेश वर्मा और अमित कुमार कोचिंग मंडी में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। उनका सेलेक्शन नहीं हुआ। यहीं पर इन दोनों की मुलाकात डॉक्टर अवध बिहारी से हुई। अमित के संपर्क में लखनऊ के लोहिया अस्पताल का डॉक्टर सचिन कुमार मौर्या आया।
वहीं बिचौलियों को तैयार किया गया। उसके बाद गैंग ने काम करना शुरू कर दिया। बिचौलिये अभ्यर्थियों को लेकर आते थे और सॉल्वर परीक्षाएं देते थे। सरगना भोलाशंकर के सीधे संपर्क में दोनों डॉक्टर व अमित रहता है। पुलिस को फोन रिकॉर्ड में भोलाशंकर के कई नंबर मिले हैं जिसके आधार पर पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की है।
कॉल ट्रेस न हो, डीलिंग भी हो जाए
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वो आपस में एक दूसरे से व्हाटसएप कॉल पर बातचीत करते थे। मोबाइल में कॉल रिकॉर्ड मिला है। उनका कहना था कि व्हाट्सएप कॉल ट्रेस नहीं होती है इसलिए वो इसी के जरिये बातचीत करते थे। दस्तावेज मंगाने के लिए वो व्हाट्सएप के साथ ही अन्य कई एप का इस्तेमाल करते थे जिससे पकड़ में न आएं। मगर पुलिस ने जब पकड़ा तो इन सभी को सुबूत मिटाने का समय नहीं मिला। पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए हैं जो बेहद अहम हैं।
कुछ एजेंसी के लोग भी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक गिरोह के संपर्क में एक दो नामचीन डॉक्टर व कुछ एजेंसी के लोग भी हैं। जो पूरा सिस्टम ऊपर बैठकर चला रहे हैं। आरोपियों की कॉल डिटेल में इससे संबंधित नंबर व अन्य साक्ष्य मिले हैं। पुलिस जल्द बड़ा खुलासा कर सकती है जिसमें बड़े लोग पुलिस की गिरफ्त में आ सकते हैं।
परीक्षा पर सवाल
आरोपियों ने बताया कि उसके गिरोह में दर्जनों लोग शामिल हैं जो शहर-शहर में बंटे हुए हैं। अभ्यर्थी मिलते ही डीलिंग पूरी होती है और फिर वो परीक्षा की तैयारी करने लगते हैं। ये अंदाजा नहीं लगाया जा सका है कि कितने सॉल्वर नीट और यूपीसीएटीईटी में बैठे थे। एक तरह से पूरी परीक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
25 हजार का दिया इनाम
एडीजी जय नारायण सिंह ने गिरोह का पर्दाफाश करने वाली टीम को 25 हजार रुपये का इनाम दिया है। इसके साथ ही डीजी कमंडेशन के लिए भी टीम का नाम भेजा जाएगा।