निर्माण कार्य और धूल बनी बड़ी चुनौती
कानपुर की रैंकिंग में गिरावट के पीछे शहर में लगातार चल रहे निर्माण कार्य, मेट्रो और सीवर लाइन के काम, टूटी सड़कों से उड़ती धूल, खुले में कचरा और अव्यवस्थित विकास कार्यों को प्रमुख कारण माना जा रहा है। इन गतिविधियों के कारण कई इलाकों में धूल और प्रदूषण की समस्या बढ़ी है, जिसका असर वायु गुणवत्ता पर पड़ रहा है।
वार्ड 78 ने प्रदेश में हासिल किया पहला स्थान
शहर की ओवरऑल रैंकिंग में गिरावट के बावजूद सिविल लाइंस स्थित वार्ड 78 ने प्रदेश स्तरीय रैंकिंग में पहला स्थान हासिल किया। वार्ड में ठोस कचरे के बेहतर निस्तारण, धूल नियंत्रण, निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) कचरे के प्रबंधन, हरित क्षेत्र विकसित करने और जनजागरूकता के लिए किए गए कार्यों को उपलब्धि का आधार बनाया गया। वार्ड स्तर पर किए गए इन प्रयासों को स्वस्थ वायु संरक्षण की दिशा में प्रभावी मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। पूरे शहर की रैंकिंग गिरने के बीच वार्ड 78 का प्रदेश में अव्वल आना नगर निगम के लिए राहत की बात है।
दिल्ली में आयोजित हुआ पुरस्कार समारोह
स्वस्थ वायु संरक्षण में बेहतर प्रदर्शन के लिए सोमवार को दिल्ली स्थित पर्यावरण भवन में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने पुरस्कार ग्रहण किया। अधिकारियों के अनुसार, प्रदेश में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, वायु गुणवत्ता सुधार और नगरीय व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के प्रयासों का असर रैंकिंग में दिखाई दिया है।
अगले साल रैंकिंग सुधारने की चुनौती
कानपुर की रैंकिंग में सुधार के लिए निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल पर प्रभावी नियंत्रण, सड़कों की स्थिति सुधारने, खुले में कचरा फेंकने पर रोक और सीएंडडी कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण पर जोर देने की जरूरत है। वार्ड 78 के बेहतर प्रदर्शन से नगर निगम को शहर के अन्य वार्डों में भी ऐसे उपाय लागू करने का मॉडल मिल सकता है।