कानपुर के मकरावटगंज ढाल पर रविवार की सुबह सीसामऊ नाले के स्लैब का एक हिस्सा ढह गया। हादसे में स्लैब पर खड़े बीएड प्रवेश परीक्षा के 20 परीक्षार्थी और अभिभावक नाले के गंदे पानी में गिर गए। परीक्षार्थियों और स्थानीय लोगों की मदद से सभी को नाले से बाहर निकाला गया।
हादसे में एक अभिभावक को गंभीर चोट लगी है। एक अभ्यर्थी का दांत टूट गया और 10 परीक्षार्थियों के हाथ-पैर में हल्की चोट लगी है। वार्ड-15 मकरावटगंज स्थित प्रो. एचएन मिश्रा पीजी कॉलेज में पहली पाली की बीएड की प्रवेश परीक्षा देने परीक्षार्थी पहुंचे थे।
परीक्षार्थियों ने बताया कि कॉलेज की ओर से कहा गया कि आधार कार्ड की फोटोकॉपी भी दें। पहले से नहीं बताया गया था कि आधार कार्ड की फोटोकॉपी चाहिए। परीक्षा में देरी न हो जाए, इसलिए परीक्षार्थी ओर उनके अभिभावक फोटोकॉपी की दुकान खोजने लगे।
मकरावटगंज ढाल पर नगर निगम मार्केट में फोटोकॉपी की दुकान पर दुकानदार का मोबाइल नंबर लिखा था। कुछ परीक्षार्थियों ने फोन किया तो दुकानदार आ गया। दुकान खुलते ही छात्र-छात्राओं की भीड़ उमड़ पड़ी। दुकान के बाहर नाला है।
नाले के स्लैब पर तकरीबन 50 लोग खड़े हो गए और फोटोकॉपी कराने लगे। अचानक नाले का स्लैब भहराकर ढह गया और 20 परीक्षार्थी नीचे गंदे पानी में जा गिरे। अन्य परीक्षार्थियों और स्थानीय लोगों की मदद से ही सभी को बाहर निकाला गया।
बेटी को परीक्षा दिलाने आए हिमांशु कुमार गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उनकी बेटी भूमि को भी चोट लगी है। हिमांशु को अस्पताल ले जाया गया। सूचना मिलते ही ग्वालटोली पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति नियंत्रित की। ग्वालटोली इंस्पेक्टर मानवेन्द्र सिंह ने बताया कि हादसे में जनहानि नहीं हुई है।
नाले की करीब 45 साल पुरानी चार इंच की स्लैब लोड पड़ने से ढह गई। मौके पर बैरिकेडिंग करा दी गई है। सोमवार से टीम लगाकर कर स्लैब का मरम्मत कार्य शुरू कराया जाएगा।- मीनाक्षी अग्रवाल, अधिशासी अभियंता, जोन-4, नगर निगम
कीचड़ से सने कपड़े, दहशत से कांपते रहे हाथ
प्रो. एचएच मिश्रा कॉलेज के पास नाले में गिरे बीएड प्रवेश परीक्षा के परीक्षार्थियों को गंदे पानी और कीचड़ से सने बदबूदार कपड़े व जूते पहनकर ही परीक्षा देने जाना पड़ा। कई परीक्षार्थियों को चोट भी लगी लेकिन उन्हें उसी स्थिति में ही परीक्षा देनी पड़ी। घबराहट के कारण कई परीक्षार्थियों के हाथ कांप रहे थे।
परीक्षा केंद्र के बाहर कुछ अभिभावकों ने हंगामा किया। उनका कहना था कि कुछ परीक्षार्थियों को टी-शर्ट बदलने के लिए दी गई लेकिन अन्य को बाथरूम में हाथ-मुंह धोने से भी मना कर दिया गया। प्रो. एचएन मिश्रा डिग्री कॉलेज में आयोजित बीएड प्रवेश परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले अचानक आधार कार्ड की फोटोकॉपी अनिवार्य कर दी गई। इससे घबराए अभ्यर्थी नजदीक की दुकानों की ओर दौड़ पड़े।
इसी दौरान एक दुकान के बाहर बना नाले का स्लैब अचानक टूट गया और वहां खड़े 20 परीक्षार्थी और अभिभावक नाले में जा गिरे। घटना के बाद परीक्षा केंद्र के बाहर अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने व्यवस्था को लेकर हंगामा किया और आरोप लगाया कि परीक्षा केंद्र के व्यवस्थापक की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ है। अभिभावकों का कहना था कि अगर पहले से आधार कार्ड की फोटोकॉपी की अनिवार्यता की जानकारी दी गई होती तो ऐसी नौबत ही नहीं आती।
दो अतिरिक्त फोटो और प्रवेश पत्र की मूल प्रति के अलावा अतिरिक्त कॉपी भी कक्ष निरीक्षक के पास जमा की जानी थी। कुछ परीक्षार्थियों के पास प्रवेश पत्र की फोटोकॉपी उपलब्ध नहीं थी तो उन्हें गेट पर तैनात कर्मियों द्वारा लाने के लिए कहा गया। यह प्रवेश पत्र पर ही स्पष्ट रूप से उल्लेखित है।
कुछ समय बाद पता चला कि कुछ परीक्षार्थी फोटोकॉपी कराने के दौरान किसी दुकान के सामने नाले के स्लैब के टूटने से गिरकर चुटहिल हो गए हैं। प्राथमिक उपचार के साथ परीक्षार्थियों को टी-शर्ट दी गई। फोटोकॉपी की दुकान महाविद्यालय परिसर से 500 मीटर के दायरे से बाहर है। - डॉ. मनोज प्रजापति, प्राचार्य, प्रो. एचएच मिश्रा कॉलेज
नौ बजे से परीक्षा थी और 8:15 बजे कॉलेज ने आधार कार्ड की फोटोकॉपी अनिवार्य कर दी जबकि यह दिशानिर्देश में नहीं था। कई छात्रों के पास फोटोकॉपी नहीं थी। किसी तरह दुकान पहुंचे और अचानक उसके बाहर नाले का स्लैब टूट गया तो हम सब नाले में गिर गए। हम सब उसी हालत में भागे। कॉलेज के कर्मचारियों ने बाथरूम गंदा न करने के लिए कहा। काफी बहस के बाद कपड़े धोए और पेपर देने गए। - खुशी शुक्ला, आवास विकास
आधार कार्ड की फोटोकॉपी के कारण ही हम सभी को दुकान की ओर जाना पड़ा। नाले में गिरने के कारण में एक दांत आधा टूट गया। परीक्षा केंद्र में तो कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। रह-रह कर घटना याद आ रही थी। झटका लगने के कारण गर्दन में दर्द है। कॉलेज की ओर से टी-शर्ट दी गई थी। जींस और जूते गीले ही पहने रहे। पानी से धोने के बाद भी बदबू आती रही। - अनन्या शुक्ला, विजयनगर
जिस रिश्तेदार के साथ आई, वह छोड़कर चले गए थे। घटना उसके बाद हुई। उनको फोन कर बुलाने का समय नहीं था। इतना घबरा गई थी कि समझ नहीं आ रहा। मेरे डॉक्यूमेंट्स भी गीले हो गए थे, बड़ी मुश्किल में उन्हें साफ कर सुखाया। पैर में मोच आ गई है, चलना मुश्किल हो गया है। पहली पाली का पेपर तो दे दिया। कॉलेज ने टी-शर्ट और दवा दी। - जूही सिंह, आजमगढ़
जैसे ही नाले में गिरा तो मेरे ऊपर कुछ और भी लोग आ गिरे। अचानक किसी ने हाथ पकड़ कर बाहर कर लिया। थोड़ी देर तो कुछ समझ ही नहीं आया कि क्या करना है। तभी पापा को आता देख जान में जान आई। किसी तरह से केंद्र तक पहुंचा लेकिन दहशत बरकरार रही। शरीर में दर्द हो रहा है। कॉलेज ने टी-शर्ट दी थी। - प्रभात, दिल्ली
जेसीबी से फोन और दस्तावेज निकाले
नाले में परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों के गिरने के कारण कुछ के फोन और जरूरी दस्तावेज भी उसी में गिर गए थे। इस पर नगर निगम की ओर से जेसीबी मंगवाई गई और नाले की सिल्ट बाहर निकलवाई गई। सिल्ट से नगर निगम के कर्मियों ने परीक्षार्थियों के फोन और कागज को अलग कर पहचान करा कर उन्हें सौंपा।
पहले भी हो चुके हैं इस तरह के हादसे
शहर में इस तरह के हादसे पहले भी हो चुके हैं लेकिन नगर निगम प्रशासन ने सीख नहीं ली। अप्रैल 2024 में जाजमऊ के गज्जू पुरवा में नाले का स्लैब ढह गया। यहां नाले के ऊपर सब्जी मंडी लगती थी। जनवरी 2025 में जाजमऊ में नाले के टूटे स्लैब से गिरकर एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। जून 2025 में गीतानगर में ठेकेदार सलीम की खुले नाले में गिरने से मौत हो गई थी। सितंबर 2025 में नवाबगंज में बुजुर्ग रज्जनलाल नाले में गिरकर बह गए थे, उनका शव घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर दूर मिला था। नवंबर 2025 में जाजमऊ बुढ़िया घाट में 12 फीट गहरे खुले नाले में बैडमिंटन निकालने के दौरान तीन साल की सानिया की गिरने से मौत हो गई थी।
स्लैब की मरम्मत का कोई ठोस मानक तय नहीं
अंग्रेजों के जमाने के सीसामऊ नाले के अलावा शहर में कई जगह नालों के स्लैब जर्जर हालत में हैं पर उनकी मरम्मत नहीं की जा रही। मकराबटगंज के अलावा पूर्व में हुए हादसों के बाद बावजूद आज तक नालों के ऊपर बने स्लैब का सर्वे नहीं कराया गया। इससे उनकी मजबूती का पता नहीं चल सका है। शहर में सबसे पुराने सीओडी, सीसामऊ और रफाका नाला हैं। इन्हीं में आकर पूरे शहर के छोटे नाले मिलते हैं।
बड़े नालों तक आने वाले छोटे नालों के स्लैब पुराने होने की वजह से जर्जर हो चुके हैं। आरबीआई कॉलोनी नाला सहित कई इलाकों के स्लैब जर्जर हो चुके हैं। स्लैब मरम्मत के लिए कोई मानक भी तय नहीं हैं। नगर निगम के चीफ इंजीनियर एसएफए जैदी ने बताया कि वैसे तो स्लैब की उम्र 70 साल आकी जाती है लेकिन इसका ढहना परिस्थिति पर भी निर्भर करता है।
मकराबटगंज में जहां हादसा हुआ, वहां एक साथ स्लैब पर लोड पड़ा जिससे वह हिस्सा ढह गया। जहां भी स्लैब जर्जर दिखता है, उसकी मरम्मत कराई जाती है। नगर निगम जोन-4 की अधिशासी अभियंता मीनाक्षी अग्रवाल ने बताया कि मकराबटगंज में ढहा हुआ स्लैब का हिस्सा सात दिन में दुरुस्त कर दिया जाएगा। हालांकि उसे मजबूत होने में 28 दिन का समय लगता है। तब तक उस पर कोई आवागमन न हो तो स्लैब को मजबूती मिलेगी।
गल गई थी स्लैब की सरिया
नगर निगम का कहना है कि स्लैब का जो हिस्सा ढहा है, वह सीसामऊ नाले का है। वह बकरमंडी ढाल से मकराबटगंज ढाल और ग्वालटोली होते हुए भैरव घाट टैपिंग पॉइंट पर मिलता है। इसकी लंबाई 1875 मीटर और चौड़ाई करीब नौ मीटर है। मकराबटगंज ढाल के पास सीसामऊ नाले के ऊपर बनी दुकानें 1990 में नगर निगम ने आवंटित की थीं। नाले के ऊपर दोनों तरफ 55 दुकानें हैं।
ये सभी नाले के स्लैब पर करीब 96 मीटर लंबाई में बनी हैं। आरके इंटरप्राइजेज (फोटोकॉपी) की दुकान के सामने क्षतिग्रस्त नाले के स्लैब की चौड़ाई करीब तीन मीटर और लंबाई पांच मीटर है। यह स्लैब करीब 40 से 50 वर्ष पुरानी है। प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि काफी पुरानी और कमजोर होने के कारण स्लैब की सरिया गल गई थीं।