कोर्ट में सभी प्रत्यक्षदर्शियों ने बयान दर्ज कराए गए, जिसमें उन्होंने बताया कि सबसे पहले दंगाइयों ने भूपेंद्र सिंह व रक्षपाल को गोली मारी। उनको छत से नीचे फेंक दिया। इसके बाद सतवीर सिंह को गोलियों से भून दिया। ऊपरी मंजिल से जब दंगाई नीचे उतरे तो देखा कि भूपेंद्र व रक्षपाल की सांसें चल रही हैं, जिसके बाद उन दोनों को पेट्रोल डालकर फूंक दिया था।
मरते-मरते बच गए थे गुरदयाल
दंगाइयों ने गुरदयाल को भी गोली मारी थी। उनका उर्सला अस्पताल में इलाज चला था। वह बच गए थे। घटनास्थल के सामने रहने वाले डेयरी मालिक वीरेंद्र सिंह ने यह केस दर्ज कराया था। हालांकि एसआईटी ने जब विवेचना की तो वीरेंद्र के खिलाफ भी कुछ साक्ष्य सामने आए। आशंका है कि वह भी दंगों में शामिल था। खुद के बचाव के लिए सामने आकर केस दर्ज कराया था। फिलहाल एसआईटी उसकी भूमिका को गहनता से जांच रही है। पुख्ता साक्ष्य होने पर उसको आरोपी बनाया जा सकता है।