कल्याणपुर के मसवानपुर निवासी संतोष शर्मा ने 17 जुलाई 1998 को कल्याणपुर थाने में अपने चाचा कन्हैयालाल व चाची उर्मिला के खिलाफ घर में घुसकर मारपीट करने के मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोपी कई साल तक कोर्ट में हाजिर नही हुए अदालत से तो उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हो गया। गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों ने कोर्ट में समर्पण अर्जी दाखिल कर समर्पण कर दिया।
आदेश के खिलाफ अपील नहीं की जा सकती
जबकि एसीजेएम द्वितीय की कोर्ट ने समर्पण अर्जी को दोष स्वीकारोक्ति अर्जी माना और 28 नवंबर 2025 को पति पत्नी को छह माह कैद और जुर्माने की सजा सुना दी। आदेश के खिलाफ सेशन कोर्ट में अपील की लेकिन सेशन जज ने 12 मार्च 2026 को यह कहते हुए अपील खारिज कर दी कि जुर्म स्वीकार करने के आधार पर दोषी करार दिए जाने के आदेश के खिलाफ अपील नहीं की जा सकती ।
सुनवाई कर फैसला सुनाने के आदेश दिए
सिर्फ सजा कम करने की मांग की जा सकती है। सेशन कोर्ट के आदेश के बाद पीड़ितों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। वहां जब हाईकोर्ट ने समर्पण अर्जी का बारीकी से परीक्षण किया तो माना कि उसमें जुर्म स्वीकार करने की कोई बात नहीं लिखी थी। इस पर ट्रायल कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार मुकदमे की दोबारा सुनवाई कर फैसला सुनाने के आदेश दिए हैं।