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Kanpur: समर्पण अर्जी को जुर्म कबूलनामा मान दी सजा, हाईकोर्ट ने आदेश किया निरस्त, अब नए सिरे से होगी सुनवाई

Fri, 14 Aug 2026 04:33 PM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला,कानपुर

सार

Kanpur News: कल्याणपुर में 28 साल पुराने मारपीट के मुकदमे में हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और सेशन कोर्ट के फैसलों को रद्द कर दिया है। ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों की समर्पण अर्जी को ही जुर्म का कबूलनामा मानकर सजा सुना दी थी, जिसे हाईकोर्ट ने गलत मानते हुए नए सिरे से निष्पक्ष सुनवाई के आदेश दिए हैं।
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सांकेतिक
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विस्तार
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कानपुर में समर्पण अर्जी को दोष स्वीकारोक्ति मानकर ट्रायल कोर्ट ने पति पत्नी को सजा सुना दी। सेशन कोर्ट में अपील की लेकिन वह भी खारिज हो गई। पीड़ितों ने इंसाफ के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो न्यायमूर्ति मनोज बजाज ने याचिका स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को गलत मानकर निरस्त कर दिया और नए सिरे से मुकदमे की सुनवाई कर फैसला सुनाने का आदेश दिया है। 

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कल्याणपुर के मसवानपुर निवासी संतोष शर्मा ने 17 जुलाई 1998 को कल्याणपुर थाने में अपने चाचा कन्हैयालाल व चाची उर्मिला के खिलाफ घर में घुसकर मारपीट करने के मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोपी कई साल तक कोर्ट में हाजिर नही हुए अदालत से तो उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हो गया। गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों ने कोर्ट में समर्पण अर्जी दाखिल कर समर्पण कर दिया।

आदेश के खिलाफ अपील नहीं की जा सकती
जबकि एसीजेएम द्वितीय की कोर्ट ने समर्पण अर्जी को दोष स्वीकारोक्ति अर्जी माना और 28 नवंबर 2025 को पति पत्नी को छह माह कैद और जुर्माने की सजा सुना दी। आदेश के खिलाफ सेशन कोर्ट में अपील की लेकिन सेशन जज ने 12 मार्च 2026 को यह कहते हुए अपील खारिज कर दी कि जुर्म स्वीकार करने के आधार पर दोषी करार दिए जाने के आदेश के खिलाफ अपील नहीं की जा सकती ।
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सुनवाई कर फैसला सुनाने के आदेश दिए
सिर्फ सजा कम करने की मांग की जा सकती है। सेशन कोर्ट के आदेश के बाद पीड़ितों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। वहां जब हाईकोर्ट ने समर्पण अर्जी का बारीकी से परीक्षण किया तो माना कि उसमें जुर्म स्वीकार करने की कोई बात नहीं लिखी थी। इस पर ट्रायल कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार मुकदमे की दोबारा सुनवाई कर फैसला सुनाने के आदेश दिए हैं।
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