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कानपुर: जज्बे को सलाम! रोज 4 घंटे अभ्यास और पदकों की बौछार, जानें पावर लिफ्टर सिया यादव का सफर

Thu, 16 Apr 2026 09:05 PM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: उभरती पावर लिफ्टर सिया यादव ने अपनी लगन, अनुशासन और मेहनत के दम पर कम समय में ही खेल जगत में पहचान बना ली है। महज दो वर्षों के भीतर उन्होंने राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में कई पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
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पावरलिफ्टर सिया यादव - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों और सीने में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो सफलता कदम चूमती ही है। इस कहावत को सच कर दिखाया है कानपुर की उभरती हुई पावरलिफ्टर सिया यादव ने। महज दो वर्षों के भीतर सिया ने जिस तरह से पदकों की झड़ी लगाई है, उसने न केवल कानपुर बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश का नाम खेल जगत में रोशन किया है। पुराना शिवली रोड की तंग गलियों से निकलकर नेशनल पोडियम तक का सफर तय करने वाली सिया अब अप्रैल 2026 में उदयपुर में होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 'स्ट्रांग वुमन' का खिताब जीतने के लिए पसीना बहा रही हैं।

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संघर्ष से सफलता तक का सफर

सिया यादव की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। दो साल पहले जब उन्होंने पावरलिफ्टिंग की दुनिया में कदम रखा था, तो उनके सामने कई चुनौतियां थीं। एक पुरुष प्रधान खेल माने जाने वाले पावरलिफ्टिंग में अपनी जगह बनाना आसान नहीं था। लेकिन सिया ने समाज की परवाह किए बिना अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया। पुराना शिवली रोड निवासी सिया ने अपनी शुरुआती ट्रेनिंग बहुत ही सीमित संसाधनों के साथ शुरू की, लेकिन उनकी लगन ने उन्हें जल्द ही प्रोफेशनल ट्रेनिंग तक पहुँचा दिया।

कोच का मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत

सिया की इस सफलता के पीछे उनके प्रशिक्षक सौरभ गौर का बड़ा हाथ है। सौरभ गौर के मार्गदर्शन में सिया ने अपनी तकनीक (Technique) और ताकत (Strength) पर बारीकी से काम किया। सिया बताती हैं कि पावरलिफ्टिंग केवल वजन उठाना नहीं है, बल्कि यह दिमाग और शरीर के बीच के संतुलन का खेल है। वह रोजाना तीन से चार घंटे कड़ा अभ्यास करती हैं। उनकी ट्रेनिंग में डेडलिफ्ट, बेंच प्रेस और स्क्वाट्स जैसे कठिन व्यायाम शामिल हैं, जिन्हें वह पूरे अनुशासन के साथ पूरा करती हैं।

आधा किलो की वह 'टीस' जो बन गई प्रेरणा

सिया के करियर में एक ऐसा मोड़ भी आया जिसने उन्हें मानसिक रूप से और मजबूत बना दिया। वर्ष 2025 में एक अंतर विद्यालयीय प्रतियोगिता के दौरान सिया ने स्वर्ण पदक तो जीता, लेकिन वह 'शक्तिशाली महिला' (Strong Woman) का खिताब जीतने से मात्र आधा किलोग्राम के अंतर से चूक गईं। सिया कहती हैं, "उस दिन मुझे एहसास हुआ कि खेल में हर एक ग्राम की कीमत क्या होती है। वह हार मेरे लिए हार नहीं, बल्कि एक सबक थी। उसी दिन मैंने तय किया था कि अब मुझे केवल मेडल नहीं, बल्कि 'स्ट्रांग वुमन' का खिताब चाहिए।"

ग्रीनपार्क में स्वर्ण और उदयपुर का टिकट

हाल ही में (अप्रैल 2026) कानपुर के ऐतिहासिक ग्रीनपार्क स्टेडियम में राष्ट्रीय चयन प्रतियोगिता आयोजित की गई। यहाँ सिया ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता। इस स्वर्ण पदक के साथ ही उनका चयन आगामी राष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता (उदयपुर) के लिए हो गया है। उदयपुर की यह प्रतियोगिता सिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि यहाँ देश भर की दिग्गज पावरलिफ्टर्स जुटेंगी और सिया का लक्ष्य यहाँ 'स्ट्रांग वुमन' का ऐतिहासिक खिताब जीतना है।

खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा

सिया यादव आज कानपुर के उन सैकड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो खेल में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। उनका मानना है कि लड़कियों को अपनी शारीरिक और मानसिक ताकत पर भरोसा करना चाहिए। खेल विभाग और स्थानीय खेल प्रेमियों ने भी सिया की इस उपलब्धि की सराहना की है। उनके पड़ोसियों और परिजनों में सिया की सफलता को लेकर जबरदस्त उत्साह है।

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भविष्य की योजनाएं

सिया का अगला लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना है। वह चाहती हैं कि वह कॉमनवेल्थ या एशियन गेम्स में तिरंगा लहरा सकें। फिलहाल, उनका पूरा ध्यान उदयपुर में होने वाली चैंपियनशिप पर है। उनके कोच सौरभ गौर को पूरा भरोसा है कि सिया जिस तरह से अभ्यास कर रही हैं, वह जल्द ही देश की शीर्ष पावरलिफ्टर्स में गिनी जाएंगी।

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