कानपुर में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की माल रोड स्थित पर्सनल बैंकिंग ब्रांच (पीबीबी) में 14.60 लाख रुपये का घोटाला सामने आया है। करीब तीन साल से निष्क्रिय खाते को सक्रिय करके चार बार में रकम निकाली गई। मामले को उच्च अधिकारी कई दिनों तक दबाए रहे। एक मई को आए गुमनाम पत्र से फर्जीवाड़े का पता चला। मामले में जांच शुरू कर दी गई है। एसबीआई की ऑफिसर्स एसोसिएशन के एक पदाधिकारी समेत कई अफसर-कर्मचारी इसमें फंस गए हैं।
बैंक के मुख्य महाप्रबंधक को भेजे गए पत्र में बताया गया कि 121-363 सिविल लाइंस कानपुर नगर कटरी बिठूर कला निवासी शिरोमणि यादव का 19 जुलाई 2006 से बैंक में खाता (संख्या 11022343963) है। इस खाते में कोई भी मोबाइल नंबर दर्ज नहीं है। खाते में 14,60,500 रुपये थे। इस खाते में लंबे समय से लेनदेन न होने के कारण इसे 2022 में निष्क्रिय कर दिया गया। पत्र में बताया गया कि बैंक में उप प्रबंधक स्तर के अधिकारी एसबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी भी हैं।
पांच लाख का भुगतान नॉन होम शाखा से कराया
वह शहर स्थित क्षेत्रीय रीजन कार्यालय द्वितीय में कार्यरत हैं। इन्होंने अन्य अफसरों और कर्मियों के साथ मिलकर फर्जी ई-केवाईसी करके इस निष्क्रिय खाते को 25 मार्च 2025 को सक्रिय करवाया। दो अप्रैल को खाते से पहली बार में पांच लाख का भुगतान नॉन होम शाखा विश्व बैंक बर्रा से कराया गया। फिर 4 अप्रैल को पांच लाख का भुगतान पीबीबी कानपुर से कराया गया। इसके बाद 9 अप्रैल 2025 को फिर बर्रा विश्व बैंक शाखा से 4.60 लाख रुपये निकाले गए।
शातिराना अंदाज में किया घोटाला
खास बात यह है कि यह घोटाला बेहतर शातिराना अंदाज में और षड्यंत्र के तहत किया गया। खाताधारक शिरोमणि यादव का पता 121-363 सिविल लाइंस कानपुर नगर कटरी बिठूर कला दर्ज है। सिविल लाइंस और कटरी बिठूर शहर के दो छोर हैं। जाहिर है फर्जी केवाईसी से चेक बुक जारी कराई गई। इसके बाद दूसरी शाखा से रकम निकाल ली गई। बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय द्वितीय की ओर से 14 जुलाई 2022 को इस खाते पर रोक (स्टॉप) लगाई गई थी।
500 रुपये का भुगतान करवा कर खाता सक्रिय कराया
दरअसल निष्क्रिय खाते को सक्रिय करवाने में आधार आधारित बायोमीट्रिक प्रक्रिया होती है। इसमें संबंधित खाताधारक के अंगूठे या मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी के जरिए केवाईसी कराया जाता है। 25 मार्च 2025 को यह प्रक्रिया पीबीबी में करवाई गई और इसी दिन खाते पर लगी लेनदेन की रोक को हटवाया गया। इसके साथ ही 500 रुपये का भुगतान करवा कर खाता सक्रिय कराया गया। इस खाते में पूर्व में चेक बुक जारी नहीं की गई थी। चेक बुक भी जारी करवाई गई और अपने किसी जानकर के पते पर उस चेक बुक को प्राप्त किया गया।
मामला संज्ञान में आया है। इसकी जांच शुरू कर दी गई है। जिस खाते से जुड़ा मामला है, इसमें दर्ज पते पर अफसरों को भेजा गया है। शुरुआती जांच में फर्जी दस्तावेज लगाए जाने का संदेह है। -राजीव रावत, डीजीएम, एसबीआई
बैंक का ओटीएमएस सिस्टम कर रहा घोटाले की ओर इशारा
बैंकों ने खातों में होने वाले सभी लेनदेन पर नजर रखने के लिए एक ऑनलाइन ऑटोमेटिक सिस्टम (ओटीएमएस) बनाया है। यह बैंक के डेटा सेंटर पर काम करता है और किसी भी असामान्य लेनदेन पर उस खाते की आधार ब्रांच को ई-मेल के जरिए इसकी सूचना देता है।
फिर से निष्क्रिय खाता बना दिया गया
संबंधित शाखा के प्रबंधक या अधिकारी की जिम्मेदारी होती है कि उस खाते के लेनदेन की ग्राहक से पुष्टि कराई जाए। संबंधित लेनदेन में कोई गड़बड़ी या घोटाला है तो तत्काल रिपोर्ट की जाए। इस मामले में भी ओटीएमएस ने अलर्ट भेजा तो पीबीबी के अधिकारी या कर्मचारी ने उस पर संदेहात्मक लिखकर नौ अप्रैल 2025 को फिर से रोक लगा दी। यानी उसे फिर से निष्क्रिय खाता बना दिया गया।