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UP: हरदोई में मेहनती और वफादार जानवरों ने छोड़ा साथ, सिर्फ 15% गधे बचे…तो सिर्फ आधे रहे श्वान, ये हैं आंकड़े

Wed, 07 May 2025 11:33 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई

सार

Hardoi Animal Census News: पशु गणना के अनुसार, पांच साल पहले जनपद में 24,167 कुत्ते थे, लेकिन अब महज 1853 कुत्ते ही जनपद में रह गए हैं। वहीं, गधों की बात की जाए तो इनकी संख्या भी पांच साल में 118 घट गई है। जिले में पांच साल पहले 137 गधे थे और अब महज 19 गधे ही बचे हैं।
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बरखेरा के गो आश्रय स्थल में पानी पीते मवेशी - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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जानवरों में कुत्ते को सबसे वफादार तो गधे को सबसे ज्यादा आज्ञाकारी माना जाता है। जहां गधे को मेहनती, अनुशासित और शांत स्वभाव अच्छी याददाश्त वाले के तौर पर जाना जाता है। वहीं कुत्ते उसकी वफदारी और बुद्धि क्षमता के लिए जाना जाता है, लेकिन अब यह दोनों ही जानवर लोगों पसंद नहीं आ रहे। कम से कम हरदोई में पशु गणना के आंकड़े तो यही बताते हैं। हर पांच साल में होने वाली पशु गणना के आंकड़े जारी हो गए हैं।

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पिछले पांच साल में जनपद में खच्चर एक भी नहीं बचे हैं। पांच साल में जनपद में एक भी खच्चर नहीं बचा है, जबकि पांच साल पहले इनकी संख्या जिले में 28 थी। इसी तरह अगर गधों की बात की जाए तो इनकी संख्या भी पांच साल में 118 घट गई है। जिले में पांच साल पहले 137 गधे थे और अब महज 19 गधे ही बचे हैं। इसी तरह पांच साल पहले जनपद में 24,167 कुत्ते थे, लेकिन अब महज 1853 कुत्ते ही जनपद में रह गए हैं। यही नहीं खरगोश, सूअर और घोड़ों की संख्या में भी आई कमी है।

पशु गणना में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं
बता दें कि जिले में पशुपालन विभाग की ओर से हर पांच वर्ष में पशु गणना कराई जाती है। विभागीय कर्मचारियों के साथ ही दूसरे विभागों के प्रशिक्षित कर्मचारियों को भी पशुगणना में लगाया जाता है। इस वर्ष के पशु गणना के आंकड़े जारी होने पर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जनपद में न तो कोई स्लाटर हाउस है और न ही कहीं गोवंशों के कटान का काम होता है।

गायों की संख्या 1.90 लाख से ज्यादा कम हुई
381 गोशालाएं जरूर संचालित की जा रही हैं। बावजूद इसके पांच साल में गायों की संख्या बेहद कम हो गई है। पांच वर्ष पहले हुई पशु गणना में जनपद में 4,19,926 गाय थीं, लेकिन अब इनकी संख्या महज 2,29,918 रह गई हैं। मतलब पांच साल में गायों की संख्या 1.90 लाख से ज्यादा कम हुई हैं। ऐसा नहीं है कि सिर्फ गायों की संख्या घटी है, बल्कि भैंस भी कम हुई हैं। पांच वर्ष में जनपद में 1.82 लाख से ज्यादा भैंस कम हो गई हैं।

महज 1853 कुत्ते ही रह गए हैं
वफादार जानवर में गिने जाने वाले कुत्तों की संख्या भी जिले में तेजी से घटी है। पांच साल पहले जनपद में 24,167 कुत्ते थे, लेकिन अब महज 1853 कुत्ते ही जनपद में रह गए हैं। बात यहीं खत्म नहीं होती। पांच साल में जनपद में एक भी खच्चर नहीं बचा है, जबकि पांच साल पहले इनकी संख्या जिले में 28 थी। इसी तरह अगर गधों की बात की जाए तो इनकी संख्या भी पांच साल में 118 घट गई है। जिले में पांच साल पहले 137 गधे थे और अब महज 19 गधे ही बचे हैं।

खरगोश, सूअर और घोड़ों की संख्या में भी आई कमी
पशु गणना के मुताबिक पांच साल पहले हरदोई जनपद में 5293 खरगोश थे। अब इनकी संख्या घटकर 113 ही रह गई है। इसी तरह 11540 सूअर पांच साल पहले जिले में थे, लेकिन अब इनकी संख्या 4124 रह गई है। घोड़ों की संख्या 1178 से घटकर 893 और भेड़ों की संख्या 17,261 से घटकर 12,255 ही बची है।

मुर्गियों की संख्या बेतहाशा बढ़ी
पांच साल में जनपद में मुर्गियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पांच साल पहले जनपद में महज 71023 मुर्गियां थीं। अब जनपद में 2,80,929 मुर्गियां हैं। इस लिहाज से देखें तो मुर्गियों की संख्या में लगभग 395 फीसदी वृद्धि हुई है। इसकी मुख्य वजह मुर्गी पालन को बढ़ावा दिया जाना माना जा रहा है। मुर्गी पालन के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जाती हैं, जिनमें इस व्यवसाय को करने वालों के लिए सब्सिडी का भी प्रावधान है।
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पशुगणना के आंकड़े जारी हो गए हैं। जनपद में लगभग सभी मवेशियों की संख्या घटी है। मवेशियों की संख्या घटने की वजहों पर पड़ताल हो रही है। कोई भी निष्कर्ष निकलेगा, तो उस अनुसार योजनाबद्ध ढंग से कार्य किया जाएगा।  -डॉ. एके सिंह, सीवीओ
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