मेन स्ट्रीम के स्कूलों में दाखिला नहीं दिया
पश्चिम बंगाल के मालदा गांव की रहने वाली रिद्धिमा को बचपन में मेन स्ट्रीम के स्कूलों में दाखिला नहीं दिया गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आईआईटियन बनने सपने को पूरा करने के लिए जी जान लगा दी। मेहनत और परिश्रम के बल पर आईआईटी कानपुर में दाखिला लिया। स्पेशल परमिशन लेकर रिद्धिमा अपनी मां अरुणिता के साथ रह रही हैं।
मां मेरे साथ कानपुर आ गईं
रिद्धिमा कहतीं हैं कि लाइफ बिल्कुल भी आसान नहीं है। ब्रश करने के लिए भी मुझे मां की जरूरत है। ऐसे में सैकड़ों किलोमीटर घर से दूर आने के मेरे फैसले ने सभी को अचंभित कर दिया था। आईआईटियन बनने में मेरे घरवालों ने भी खूब सहयोग किया। रिद्धिमा कहती हैं कि मेरे पिता राजीव पॉल पश्चिम बंगाल पुलिस में हैं भाई सातवीं कक्षा में है। सबको वहीं छोड़कर मां मेरे साथ कानपुर आ गईं।
हर दिन है नई चुनौतियां
रिद्धिमा कहती हैं कि मेरे लिए हर दिन नई चुनौती है। हर दिन ऐसा जरूर होता है जब मन काफी उदास होता है लेकिन अपने लक्ष्य को ध्यान में रखती हूं। ओरिएंटेशन के दौरान योगा का सेशन में मैं चुपचाप एक कोने में बैठी रही। कई बार ऐसा होता है कि मन में आता है मैं सामान्य क्यों नहीं हूं, बाकी बच्चे जैसा कर रहे मैं वैसा क्यों नहीं कर पा रही हूं।
बेटी मेधावी, करेंगे पूरा सहयोग
रिद्धिमा की मां अरुणिता कहती हैं कि बेटी शुरू से टॉप रैंकर रही है। इतनी गंभीर बीमार होने के बाद भी उसने पढ़ाई से मुंह नहीं चुराया। इस वजह से उसका सहयोग करने के लिए अपने बेटे को छोड़कर यहां आ गए हैं।