अंतिम निर्णय श्रीराम पर ही छोड़ दिया
श्रीराम के वचन सुनकर भरत की आंखों से अश्रुधारा बहने लगी और वह भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि वह जीते जी ऐसा नहीं कर सकते, सिंहासन पर आपका ही अधिकार है और आपके रहते वह कभी सिंहासन पर नहीं बैठेंगे। इसके साथ ही उन्होंने अंतिम निर्णय श्रीराम पर ही छोड़ दिया।
जनक जी के आगमन की प्रतीक्षा करने लगे
इसी दौरान मिथिला से राजा जनक के दूत चित्रकूट पहुंचे और राजा जनक व रानी सुनैना के आगमन का संदेश दिया। समाचार सुनकर श्रीराम, लक्ष्मण, सीता सहित भरत, शत्रुघ्न और अयोध्या से आए सभी प्रजाजन जनक जी के आगमन की प्रतीक्षा करने लगे।