दुकानदारों ने गर्म कपड़े मंगाने से इन्कार कर दिया
लोग दुकानों तक आने की जहमत नहीं उठाना चाहते है। बताया कि ज्यादातर गर्म कपड़े लुधियाना और सूरत से आते है लेकिन दुकानों पर सन्नाटा देख दुकानदारों ने गर्म कपड़े मंगाने से इन्कार कर दिया है। बताया कि इन दिनों कनटोपे जरूर अधिक बिक रहे है। लोग वॉकमैन टोपा, वॉकमैन लाइट टोपा, चोचू टोपा, मफलर आदि पसंद कर रहे है। बताया कि 20 से 450 रुपये के कनटोपे और 200 से 1000 रुपये तक के स्वेटर मार्केट में है।
हाथ के बुने स्वेटरों का खत्म हो रहा क्रेज
एक समय था जब लोग हाथ के बुने स्वेटर पहनने पर गर्व महसूस करते थे। कहाते थे इसे मेरी मां या भाभी ने बुना है लेकिन आज क्रेज लगभग खत्म हो चुका है। यही कारण है कभी बाजारों में बिकने वाली ऊन और क्रोसिया बाजार से गायब हो गई है। ऊनी स्वेटर बेचने वाले दुकानदार जीशान अली, राहुल अग्रवाल ने बताया कि साल 2015 के बाद से बुने हुए स्वेटरों का क्रेज खत्म होने लगा था आज तो बाजार से बिकने वाली ऊन ही गायब है। इस संबंध में महिलाओं से बताया कि अब समय बदला गया है। किसी के पास स्वेटर बुनने का वक्त नहीं है।
अन्य उत्पादों पर भी पड़ रहा असर
व्यापारी गोवर्धन गुप्ता, संजय यादव ने बताया कि ऑनलाइन ट्रेडिंग का असर घरेलू उत्पादों के साथ ही लोगों की रोजमर्रा की चीजों पर भी पड़ा है। पहले लोग दुकानों में आकर रसोई आदि का समान खरीदते थे, लेकिन अब ज्यादातर लोग घर बैठे सामान मंगा रहे है। फुटकर दुकानदारों का व्यापार खत्म होता जा रहा है।