फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kanpur: ऑनलाइन ट्रेडिंग खत्म कर रहा फुटकर बाजार, गर्म कपड़ों का मार्केट ठंडा…दुकानदार बैठे हैं खाली

Sat, 29 Nov 2025 12:09 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: शुक्लागंज में ऑनलाइन ट्रेडिंग के बढ़ते चलन के कारण गर्म कपड़ों का फुटकर बाजार लगभग ठप हो गया है। इससे दुकानदारों ने नया स्टॉक मंगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, कनटोपे की बिक्री अब भी जारी है।
विज्ञापन
शुक्लागंज में गर्म कपड़ों का फुटकर बाजार ठप - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

शुक्लागंज में ऑनलाइन ट्रेडिंग बाजार ने फुटकर बाजार को लगभग खत्म होने की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। घर बैठे लोग मोबाइल से बुंकिग कर गर्म कपड़े मंगा रहे है। ऐसे में राजधानी मार्ग समेत अन्य बाजारों में दुकानदार ग्राहकों के आने का इंतजार करते रहते है। हालांकि दो-चार ग्राहक दुकानों पर पर पहुंचकर फुटकर दुकानदारों को राहत पहुंचा रहे है।

विज्ञापन

राजधानी मार्ग पर गर्म कपड़ों की दुकान लगाने वाले आशीष, राजेश गुप्ता, अनमोल, लकी गुप्ता, सुनील सिंह ने बताया कि इस वक्त ऑनलाइन खरीदारी पर लोग अधिक ध्यान दे रहे है। दो साल पहले ठंड पड़ते ही गर्म कपड़ों की दुकानों में ग्राहकों की भीड़ लग जाती थी, लेकिन अब फुटकर दुकानदारों का गर्म कपड़ों का बाजार ठंडे बस्ते में है। लोग घर बैठे ऊनी कपड़े मंगा रहे हैं।

दुकानदारों ने गर्म कपड़े मंगाने से इन्कार कर दिया
लोग दुकानों तक आने की जहमत नहीं उठाना चाहते है। बताया कि ज्यादातर गर्म कपड़े लुधियाना और सूरत से आते है लेकिन दुकानों पर सन्नाटा देख दुकानदारों ने गर्म कपड़े मंगाने से इन्कार कर दिया है। बताया कि इन दिनों कनटोपे जरूर अधिक बिक रहे है। लोग वॉकमैन टोपा, वॉकमैन लाइट टोपा, चोचू टोपा, मफलर आदि पसंद कर रहे है। बताया कि 20 से 450 रुपये के कनटोपे और 200 से 1000 रुपये तक के स्वेटर मार्केट में है।

हाथ के बुने स्वेटरों का खत्म हो रहा क्रेज
एक समय था जब लोग हाथ के बुने स्वेटर पहनने पर गर्व महसूस करते थे। कहाते थे इसे मेरी मां या भाभी ने बुना है लेकिन आज क्रेज लगभग खत्म हो चुका है। यही कारण है कभी बाजारों में बिकने वाली ऊन और क्रोसिया बाजार से गायब हो गई है। ऊनी स्वेटर बेचने वाले दुकानदार जीशान अली, राहुल अग्रवाल ने बताया कि साल 2015 के बाद से बुने हुए स्वेटरों का क्रेज खत्म होने लगा था आज तो बाजार से बिकने वाली ऊन ही गायब है। इस संबंध में महिलाओं से बताया कि अब समय बदला गया है। किसी के पास स्वेटर बुनने का वक्त नहीं है।
विज्ञापन

अन्य उत्पादों पर भी पड़ रहा असर
व्यापारी गोवर्धन गुप्ता, संजय यादव ने बताया कि ऑनलाइन ट्रेडिंग का असर घरेलू उत्पादों के साथ ही लोगों की रोजमर्रा की चीजों पर भी पड़ा है। पहले लोग दुकानों में आकर रसोई आदि का समान खरीदते थे, लेकिन अब ज्यादातर लोग घर बैठे सामान मंगा रहे है। फुटकर दुकानदारों का व्यापार खत्म होता जा रहा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें