नाबालिग से दुष्कर्म के झूठे मुकदमे में फंसाया
रवि सतीजा ने छह अगस्त को बर्रा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें अखिलेश दुबे, लवी मिश्रा, शैलेंद्र यादव, अभिषेक बाजपेई और विमल यादव व दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली दो युवतियों को आरोपी बनाया था। दावा किया था कि अखिलेश दुबे व साथियों ने मिलकर उन्हें नाबालिग से दुष्कर्म के झूठे मुकदमे में फंसाया।
मुकदमे से बचाने के लिए 50 लाख रुपये मांगे
जांच में घटना झूठी पाए जाने पर एफआर लगी तो आरोपियों ने उनके सोना मेंशन बिल्डिंग की छत पर कब्जे और जान माल की धमकी दी। वादिनी मुकदमा के माध्यम से कोर्ट में कूटरचित शपथपत्र दिलवाया गया फिर रवि को अखिलेश ने अपने कार्यालय में बुलाकर मुकदमे से बचाने के लिए 50 लाख रुपये मांगे।
तीनों के खिलाफ 22 सितंबर 2025 को चार्जशीट भेज दी थी
इसी मामले में पुलिस ने अखिलेश दुबे, लवी मिश्रा को गिरफ्तार कर अगले दिन सात अगस्त को जेल भेजा था। मामले में आरोपी शैलेंद्र यादव उर्फ टोनू को भी गिरफ्तार कर जेल भेजने के साथ तीनों के खिलाफ 22 सितंबर 2025 को कोर्ट में चार्जशीट भेज दी थी।
25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित हुआ था
वहीं, चौथा आरोपी अभिषेक बाजपेई उर्फ प्रियांशु कोर्ट में समर्पण कर जेल चला गया था। पुलिस ने उसके खिलाफ 20 फरवरी को मामले की दूसरी चार्जशीट कोर्ट भेजी थी। वहीं, युवतियां मामले में सरकारी गवाह बन गईं हैं। आरोपी विमल यादव पर 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित हुआ था।
विवेचना खत्म करने की बात कही है
कुर्की का नोटिस भी पुलिस ने चस्पा किया, लेकिन विमल ने न तो समर्पण किया और न ही गिरफ्तारी हुई। इस बीच हाईकोर्ट से विमल को राहत मिल गई थी। इसके बाद पुलिस ने नोटिस देकर विमल से पूछताछ की और उसके खिलाफ भी पर्याप्त सबूत मिलने के बाद तीसरी चार्जशीट कोर्ट में दाखिल करते हुए विवेचना खत्म करने की बात कही है।