नशीली दवाओं की शिकायत पर ड्रग विभाग, पंजाब के नारकोटिक्स विभाग व स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से मंगलवार को बिरहाना रोड स्थित एक फर्म पर छापा मारा। इस दौरान फर्म से पांच लाख रुपये की नकली दवाएं बरामद हुईं। इतना ही नहीं यहां नकली दवाओं पर बैच नंबर, एक्सपायरी तिथि और एमआरपी भी प्रिंट की जा रही थी। मौके पर प्रिंटर भी बरामद हुआ है। विभाग ने 29 लाख रुपये और पांच लाख की दवाइयां जब्त की हैं। फार्म का निदेशक मौके से भाग निकला।
पंजाब में बिरहाना रोड के नील वाली गली स्थित श्री लक्ष्मी फार्मा के यहां से नशीली दवाइयां बेचने की शिकायत पंजाब पुलिस ने शहर के ड्रग विभाग में की थी। इसके बाद मंगलवार को ड्रग विभाग के इंस्पेक्टर ओमपाल, रेखा सचान, कानपुर देहात के ड्रग इंस्पेक्टर अजय कुमार, एंटीनारकोटिक्स टास्क फोर्स, लुधियाना रेंज, पंजाब व कानपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने सुबह साढ़े दस बजे फर्म पर छापा मारा। नीचे फर्म चल रही थी और ऊपर परिवार रहता मिला। घर से भी सारा काम किया जा रहा था। करीब चार घंटे तक चली जांच में फर्म से पांच लाख रुपये की नकली दवाएं, नकली दवाओं के रैपर, उनके बॉक्स मिले। दवाओं के रैपर पर बैच नंबर, एक्सपायरी तिथि व एमआरपी डालने के लिए एक मिनी पोर्टेबल प्रिंटर बरामद हुआ। इसके अलावा खाली बॉक्स, लेबल भी मिले हैं। 25 लाख रुपये की नकद राशि बरामद हुई।
इस तरह से पैक होकर बिक रहीं थी नकली दवाएं
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ड्रग इंस्पेक्टर रेखा सचान ने बताया कि छापे के दौरान फर्म का मालिक राहुल अग्रवाल मौजूद था। उसने दावे के साथ कहा कि वह नशीली दवाएं नहीं बेचता है। दुकान एकदम साफ-सुथरी मिली। इस पर टीम को शक हुआ और तीसरे माले पर बने राहुल के घर में जब छापा मारा गया तो वहां से नकली दवाएं बरामद हुईं। इस दौरान राहुल मौके से भाग निकला। घर पर उनकी पत्नी मिली जिसने कोई जानकारी न होने की बात कही। टीम को मौके पर नशीली दवाएं तो नहीं लेकिन पांच लाख रुपये की नकली दवाएं मिलीं। यह उसके घर में ही तैयार की गई थीं। इन दवाओं के खरीदने व बेचने के भी कोई साक्ष्य नहीं मिले। इनके पास कोई बिल नहीं था। कैश गिनने वाली मशीन और 29 लाख रुपये कैश भी बरामद हुआ है। सुबह साढ़े दस बजे से शुरू हुई जांच रात दस बजे तक चली। दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेजेंगे और फर्म के मालिक पर एफआईआर भी दर्ज कराएंगे।
ड्रग इंस्पेक्टर ओमपाल ने बताया कि मौके पर मिले तथ्यों के अनुसार प्रतीत हो रहा है कि यहां पर नकली दवाएं बनाई जाती हैं और उनको पैक करने का काम भी होता है। इतना ही नहीं यहां एक्सपायरी दवाओं की एक्सपायरी डेट मिटाकर उन पर फिर से नई तारीख के लेबल लगाए गए हैं। सभी चीजों को जब्त कर लिया गया है।
ड्रग्स विभाग का छापा
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बुखार, पेटदर्द और गैस की बेच रहा था नकली दवाएं
राहुल की फर्म में गैस, पेट दर्द, बुखार, एंटीबायोटिक टैबलेट व इंजेक्शन सहित छह तरह की नकली दवाएं मिली हैं। इनकी कीमत करीब पांच लाख रुपये आंकी गई है। राहुल के घर में ही नकली दवाओं की लेबलिंग की जाती थी। इन्हें ब्रांडेड दवाओं के बॉक्स में रखा जाता था। नामी कंपनियों के यह बॉक्स घर में ही प्रिंट किए जाते थे। टीम का अनुमान है कि यह दवाएं कहीं पर तैयार की जा रही थीं या फिर इन दवाओं को कहीं से खरीदकर उन्हें नामी दवा कंपनियों के नाम पर बनाए बॉक्स में रखकर बेचा जा रहा था। इन दवाओं की सप्लाई ग्रामीण क्षेत्र में होने की आशंका विभाग को है।