वैट और जीएसटी की कुल बकायेदारी 135 करोड़
इसमें सभी जोन के वैट और जीएसटी के टॉप 10 बकायेदारों की सूची बनाकर उनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। शहर में एसजीएसटी विभाग दोनों जोनों में बंटा हुआ है। जोन-1 में वैट और जीएसटी की बकायेदारी 10-10 करोड़ रुपये है। जोन-2 में वैट की बकायेदारी 17 और जीएसटी की बकायेदारी 98 करोड़ रुपये है। दोनों जोनों में वैट और जीएसटी की कुल बकायेदारी 135 करोड़ है। दोनों जोनों में 21 खंड हैं। दरअसल 30 जून 2017 तक प्रदेश में वैट लागू था। एक जुलाई 2017 से जीएसटी लागू कर दिया गया।
एसजीएसटी विभाग के अधिकारी
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संपत्ति कुर्क करने और अटैच करने के निर्देश
अब विभाग पिछले वर्षों के बकाया डिमांड आदेश के आधार पर बकायेदारों पर कार्रवाई कर रहा है। शासन से निर्देश हैं कि सभी बकायेदारों को नोटिस भेजा जाए। डीआरसी तीन जारी की जाए। इसके बाद भी बकाया भुगतान न करने पर उनकी संपत्ति या बैंक खाते अटैच किए जाएं। एसजीएसटी के अपर आयुक्त (ग्रेड एक, जोन द्वितीय) आरएस विद्यार्थी ने बताया कि वैट और जीएसटी के बकायेदारों पर कार्रवाई करने के निर्देश शासन से हैं। इसी क्रम में आरसी जारी की जा रही है। संपत्ति कुर्क करने और अटैच करने के निर्देश हैं। टॉप 10 बकायेदारों की सूची भी बनाई गई है। यदि किसी व्यापारी या उद्यमी ने आरसी जारी होने के बाद बकाया भुगतान किया है तो वह विभाग में इसकी जानकारी दे ताकि उसे संशोधित किया जा सके।
किसी पर 15 लाख तो किसी पर दो करोड़ का बकाया
दोनों जोनों में वैट और जीएसटी के बकायेदारों की सूची में मिठाई, रेस्टाेरेंट, केमिकल, गैस, जर्दा, स्टील, फार्मा, रियल इस्टेट, कृषि से जुड़ी फर्में हैं। एक कार शोरूम संचालक पर दो करोड़ से ज्यादा की जीएसटी बकाया है। स्टील फर्म संचालक पर 15 लाख की बकायेदारी है। मिठाई और रेस्टोरेंट संचालक पर 13 लाख से ज्यादा की वैट की बकायेदारी है।