सरकारी विद्यालयों में सुविधाओं के लाख दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। नरवल तहसील के कई विद्यालयों में बच्चों के बैठने तक के लिए फर्नीचर नहीं है, पीने के पानी की भी व्यवस्था नहीं है। मजबूरी में बच्चे हाईवे पर पानी के लिए भटकते नजर आते हैं। यही वजह है कि सरकारी स्कूलों से बच्चों की संख्या लगातार घट रही है।
अमर उजाला की पड़ताल में विकासखंड सरसौल के ग्राम पुरवामीर स्थित कंपोजिट विद्यालय की स्थिति बेहद खराब मिली। कक्षा एक से आठ तक के सभी 246 बच्चे जमीन पर बैठे मिले। विद्यालय में फर्नीचर के नाम पर सिर्फ अध्यापकों के लिए कुर्सियां हैं, बच्चों के लिए एक भी डेस्क-बेंच नहीं है।