बढ़ता प्रदूषण और खाने में पेस्टिसाइड है कारण
उनमें ये दिक्कत हर तीसरे बच्चे में देखने को मिलती है। हैरानी की बात यह है कि अस्पताल आने वाली सौ से डेढ़ सौ किशोरियों में करीब 20 से 40 किशोरियां ऐसी हैं जो हरी सब्जी खा रहीं हैं और समय पर सोने के साथ हल्का-फुल्का व्यायाम या शारीरिक गतिविधि भी करती है। उनमें भी पीसीओडी देखने को मिल रहा है। इसका कारण बढ़ता प्रदूषण और खाने में पेस्टिसाइड है।
लड़कियों के चेहरे पर अनचाहे बाल आ जा रहे
दूध में भी उत्पादन बढ़ाने के लिए हार्मोनल इंजेक्शन लगाते हैं, जो हमारे शरीर के लिए बहुत नुकसानदायक है। इसी तरह फसलों में अंधाधुंध पेस्टिसाइड का उपयोग शरीर के एंडोक्राइन सिस्टम के लिए नुकसानदायक है। इसके अलावा वातावरण में मौजूद टॉक्सिन्स भी हार्मोन्स को असंतुलित कर रहे हैं। डॉ. दिव्या ने बताया कि लड़कियों के चेहरे पर अनचाहे बाल आ जा रहे हैं।
भविष्य में बांझपन का कारण बन सकता है
इसका कारण टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का बढ़ना है। हालांकि यह मेल हार्मोन है, लेकिन यह महिलाओं में भी कम मात्रा में होता है। पीसीओडी की स्थिति में इसका स्तर बढ़ जाता है जिससे शारीरिक बनावट और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। विभागाध्यक्ष डॉ. रेनू गुप्ता ने बताया कि पीसीओडी पर यदि समय रहते ध्यान न दिया गया, तो यह भविष्य में बांझपन का कारण बन सकता है। शुद्ध खान-पान, नियमित व्यायाम और प्राकृतिक जीवनशैली ही इससे बचने का एकमात्र रास्ता है।
ओपीडी में बढ़े मरीज
पांच साल पहले हैलट जच्चा-बच्चा अस्पताल की ओपीडी में हर महीने 50 से 60 किशोरियां पीसीओडी से ग्रसित आ रही थीं। इनमें 10 से 20 ऐसी थीं जो प्रदूषण और पेस्टिसाइड के चलते पीसीओडी की शिकार हुईं। अब यही संख्या 120 से 150 हो गई है। इसमें 20 से 40 ऐसी हैं जिन्हें प्रदूषण और पेस्टिसाइड के चलते पीसीओडी हो रही है।