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Kanpur: मतदाता सूची से सियासी दलों में हलचल, जनपद में 2.38 लाख नए वोटर जुड़े और 9.23 लाख के नाम कटे, पढ़ें डिटेल

Sun, 12 Apr 2026 12:44 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: कानपुर में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के बाद 9.23 लाख नाम हटाए गए और 2.38 लाख नए वोटर जुड़े हैं। सबसे ज्यादा नए वोटर महाराजपुर में होने से वहां के चुनावी समीकरण दिलचस्प हो गए हैं।
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कानपुर मतदाता सूची 2026 - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद जारी हुई अंतिम मतदाता सूची ने जिले की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। आंकड़ों के मुताबिक 2.38 लाख नए मतदाता जुड़े हैं और 9.23 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। यह बदलाव आने वाले चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। अब जिले की दसों विधानसभा सीटों को मिलाकर कुल 28,51,060 मतदाता हो गए हैं। चर्चा है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने और जुड़ने से किसे फायदा होगा और किसकी मुश्किलें बढ़ाएगा।

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जिले में वर्ष 2022 की मतदाता सूची में 35.38 लाख मतदाता थे। एसआईआर के बाद सूची से कुल 9.02 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए जिससे मतदाताओं की संख्या घटकर 26.36 लाख ही रह गई। इसमें करीब छह लाख मतदाता नो मैपिंग में शामिल हुए। इसमें से करीब 2,07,661 ऐसे मतदाता थे जो 2003 की सूची के आधार पर कोई डिटेल गणना प्रपत्र में नहीं भर पाए थे। इन सभी को नोटिस जारी किया गया जिसमें करीब 5.87 लाख लोग ही सुनवाई के लिए उपस्थित हुए।

नए नामों को लेकर राजनीतिक दलों की नजरें टिकी
21,321 लोग फिर भी नहीं पहुंचे, जिनके नाम भी सूची से हटा दिए गए। यानी अंतिम प्रकाशन तक कुल मिलाकर 9.23 लाख मतदाता के नाम सूची से बाहर हो गए। जनवरी से मार्च तक जिले में फार्म 6, 7, 8 के आवेदन मांगे गए जिसमें करीब 2,38,204 नए मतदाता जुड़े, जिसको मिलाकर जिले में मतदाताओं की संख्या 28,51,060 पहुंच गई।  सूची में जुड़े नए नामों को लेकर राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हैं। इनमें बड़ी संख्या युवाओं की मानी जा रही है, जो पहली बार वोट डालेंगे।
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विपक्षी दल सवाल उठाने से नहीं चूक रहे हैं
खास बात यह है कि महाराजपुर विधानसभा में सबसे ज्यादा नए मतदाता जुड़े हैं, जिससे इस सीट का चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। युवा वोटर अक्सर मुद्दों और विकास के आधार पर मतदान करते हैं, ऐसे में यहां मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है। दूसरी तरफ 9.23 लाख नामों का हटना प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा जरूर बताया जा रहा है, लेकिन सियासी नजरिए से यह सबसे बड़ा फैक्टर बन गया है। इनमें मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, लेकिन विपक्षी दल इस पर सवाल उठाने से नहीं चूक रहे हैं।
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