तुरंत क्राइम ब्रांच से संपर्क करने पर फायदा
बैंकिंग, ऑनलाइन फ्रॉड को रोकने के लिए कानपुर पुलिस सक्रिय हो चुकी है। इसे लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। बड़े नोटों की बंदी के बाद आने वाले समय में भुगतान, खरीदारी में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन होंगे तो साइबर, बैंकिंग, ऑनलाइन शापिंग में फ्राड भी बढ़ेंगे जिसे लेकर पुलिस विशेष तैयारियां कर रही है। एसएसपी आकाश कुलहरि ने बताया कि बैंकों, शापिंग साइटों द्वारा एडवाइजरी जारी की जाती है। पुलिस भी प्रचार-प्रसार के माध्यमों से लोगों को जागरूक करने का काम करती है। कार्ड, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन में सावधानी बरतें और किसी भी शंका पर पुलिस को सूचना दें।
तुरंत क्राइम ब्रांच से संपर्क करने पर फायदा
पैसा निकलने का मैसेज आते ही पीड़ित को सबसे पहले बैंक को सूचना देकर कार्ड को ब्लॉक कराना चाहिए। इसके बाद पुलिस से संपर्क करना चाहिए। कई मामलों में खरीददारी करते समय वस्तु की डिलीवरी(48 घंटे) के बाद ही खाते से पैसा निकलता है। पेमेंट गेटवे से किसी बैंक में पैसा तुरंत ट्रांसफर हो जाता है। वस्तु की डिलीवरी और खाते में पैसा ट्रांसफर होने से पहले पुलिस संबंधित बैंक या ई- मर्चेंट से संपर्क करले तो पैसा वापस आ सकता है। पुलिस धोखाधड़ी की जानकारी देते हुए ई- मर्चेंट से वस्तु की डिलीवरी रुकवा सकती है। डिलिवरी रुक गई तो खाते से पैसा भी नही निकल पाएगा।
ऐसे होती है ऑनलाइन शापिंग में ठगी
ऑनलाइन ठग फर्जी आईडी से कई सिमकार्ड लेकर फोन करते हैं। वह आपके कार्ड के ब्लॉक होने की सूचना देता है। दूसरा ठग अपने मोबाइल पर पेमेंट गेटवे खोलता है जिसपर ऑनलाइन शापिंग, फोन बैलेंस जैसे कई ऑप्शन होते हैं। किसी भी ऑप्शन को क्लिक करते ही पेमेंट करने वाले कार्ड का सीवीवी(कार्ड वेरीफिकेशन वैल्यू) नंबर पूछा जाता है। पहला ठग शिकार से कार्ड के पीछे की ओर लिखे 3 अंक (कुछ बैंक में 4 अंक) का सीवीवी नंबर पूछता है। सीवीवी नंबर मिलते ही दूसरा ठग उसे किसी पेमेंट गेटवे या ई- मर्चेंट पर डालता है। पहला ठग शिकार से कहता है कि अपने नंबर पर आए ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) को बताएं। जैसे ही शिकार ओटीपी बताता है ठग ओटीपी इस्तेमाल कर खरीदारी, फोन रिचार्ज या कई मामलों में रकम भी खाते में ट्रांसफर कर लेते हैं। खरीदारी को तब पता चलता है जब उसके मोबाइल पर मैसेज आता है।