ऐसे में माना जा रहा है कि यह सभी लॉकर बंद थे और इनमें सामान रखा हुआ था। दूसरा, बैंक यह नहीं बता पा रहा है कि शिफ्टिंग से पहले उसने लॉकर धारकों को पत्र लिखकर उसे खाली करने या शिफ्ट करने से संबंधित कोई जानकारी दी थी या नहीं। चूंकि आरबीआई का स्टैंडिंग ऑपरेटिंग प्रोसीजर के तहत ही यह काम होता है जिसमें लॉकर खाली होने पर ही शिफ्ट किया जाता है।
ऐसे में अगर चाभियां नहीं थी तो यह माना जा सकता है कि बैंक ने भरे हुए लॉकर ही शिफ्ट कर दिए। साथ ही जिन लॉकरों का पता नहीं चल रहा उनमें रखे सामान के गायब होने पर भी बैंक की ही जिम्मेदारी बनेगी। इन्हीं तर्कों के साथ अब जांच अधिकारियों ने बैंक अफसरों को घेरने के लिए कमर कस ली है। माना जा रहा है कि अगर बैंक अफसरों की ओर से वाजिब जवाब नहीं मिलते हैं तो क्राइम ब्रांच उनकी गिरफ्तारी भी कर सकती है।