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कानपुर: पीएम किसान सम्मान निधि पर संकट, तीन हजार किसानों की किस्त अटकी, 30 सितंबर तक सत्यापन कराने के निर्देश

Tue, 22 Sep 2026 04:45 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: कानपुर जिले के 3,000 से अधिक किसानों की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की किस्त अधूरे और संदिग्ध डाटा के कारण अटक गई है। पोर्टल पर भू-स्वामित्व, म्यूटेशन और पहचान से जुड़ी गड़बड़ियों के चलते 1,450 आवेदन सत्यापन के लिए लंबित हैं, जबकि 774 डाटा सस्पेक्टेड श्रेणी में हैं।
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किसान सम्मान निधि पटल पर जानकारी करने पहुंचे किसान - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर जिले के तीन हजार से अधिक किसानों की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की किस्त अधूरे और संदिग्ध डाटा के कारण अटक गई है। इसमें 774 लाभार्थियों का डाटा सस्पेक्टेड है। भारत सरकार के पीएम-किसान पोर्टल पर इन किसानों की जानकारी में जमीन के स्वामित्व, म्यूटेशन और पहचान से जुड़ी गड़बड़ियां हैं। सत्यापन के बाद डाटा दुरुस्त होना था लेकिन निर्देशों के बावजूद अब तक बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं।

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अब शासन ने सितंबर के अंत तक सभी लंबित प्रकरणों का शत-प्रतिशत सत्यापन कर डाटा अपडेट करने के निर्देश दिए है। कानपुर में करीब 2.18 लाख किसान पीएम-किसान सम्मान निधि का लाभ ले रहे हैं। इनमें से तीन हजार से अधिक किसानों का डाटा संदिग्ध अथवा अपूर्ण श्रेणी में आने से उनकी किस्त पर रोक लगी हुई है, जिसमें 1450 आवेदन सत्यापन को लंबित हैं। 774 सस्पेक्टेड डाटा और करीब 795 डाटा बरासत बाला लंबित है।

जिलों को सत्यापन के निर्देश दिए थे
समय रहते सत्यापन नहीं हुआ तो इन किसानों के पात्रता सूची से बाहर होने की आशंका है। दरअसल, पंजीकरण के दौरान भूमि स्वामित्व और अन्य विवरणों में गड़बड़ियां मिलने पर शासन ने ऐसे लाभार्थियों की सूची तैयार कर जिलों को सत्यापन के निर्देश दिए थे। प्रदेश में ऐसे 15,35,858 मामले सामने आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा 10,19,117 मामले पूर्व भूमि स्वामी की पहचान अधूरी होने से जुड़े हैं।

माइक्रो प्लान किया जाएगा तैयार
इसके अलावा 2,74,742 मामलों में विरासत के अलावा किसी अन्य कारण से म्यूटेशन दर्ज है, जबकि 2,41,999 मामलों में पूर्व और वर्तमान दोनों भूमि स्वामियों का डाटा दर्ज है। शासन ने अब फार्मर रजिस्ट्री अभियान के साथ पीएम-किसान के लंबित मामलों के सत्यापन को जोड़ने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए ब्लॉक, तहसील और जिला स्तर पर माइक्रो प्लान तैयार किया जाएगा।

संदिग्ध डाटा का कराया जाएगा भौतिक सत्यापन
किसानों की भागीदारी और स्थानीय प्रशासन के समन्वय से संदिग्ध डाटा का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। 30 सितंबर तक सभी लंबित मामलों का सत्यापन पूरा कर उसकी रिपोर्ट एप पर अपलोड करनी होगी। जिला स्तर पर उप कृषि निदेशक और तहसील स्तर पर तहसीलदार साप्ताहिक समीक्षा करेंगे। वहीं ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक रोजाना प्रगति की निगरानी और जिम्मेदारी तय की जाएगी।
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शासन के निर्देशों पर लंबित डाटा संबंधित तहसालों को भेज दिया गया है। जल्द सत्यापन कर रिपोर्ट शासन भेजी जाएगी।  -आरएस वर्मा, उपनिदेशक कृषि
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