ब्रिटिश इंडिया कॉरपोरेशन (बीआईसी) के अधीन संचालित होने वाली लाल इमली मिल चलने की उम्मीद धुंधली पड़ रही है। प्रधानमंत्री से उम्मीद लगाए बैठे लाल इमली मिल कर्मचारी निराश हैं। शहर आए प्रधानमंत्री ने कानपुर के चमड़ा, एमएसएमई पर बात की लेकिन मिल के संबंध में कुछ भी नहीं कहा।
पिछले साल अगस्त में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिल चलाने के लिए पैकेज देने की घोषणा की थी। इससे उम्मीद जगी थी कि जल्द ही मिल चलने लगेगी। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सैकड़ों लाेगों को रोजगार मिलेगा। अब तक कोई पैकेज घोषित भी नहीं किया गया है। केंद्र और प्रदेश सरकार के बजट भी आ चुके हैं।
इसके अलावा घोषणा के बाद कई बार मुख्यमंत्री शहर भी आए, लेकिन मिल के संबंध में कोई बात नहीं की। अब पीएम के कोई चर्चा न करने से माना जा रहा है कि इसी साल के अंत तक या 2026 की शुरुआत में मिल पर बंदी पर मुहर लग सकती है। पहले बीआईसी को बंद किया जाएगा। एनटीसी को बांद में बंद किया जा सकता है।
संपत्तियों के मूल्यांकन के लिए भी कोई टीम नहीं आई। उधर, कर्मचारियों को 31 मार्च 2025 तक बकाया भुगतान की प्रक्रिया चल रही है। कानपुर में नेशनल टेक्सटाइल कॉरपोरेशन (एनटीसी) और ब्रिटिश इंडिया कॉरपोरेशन (बीआईसी) की 366 एकड़ जमीन है। एनटीसी की कानपुर में परेड स्थित म्योर मिल, ग्वालटोली स्थित न्यू विक्टोरिया मिल, जूही हमीरपुर रोड स्थित स्वदेशी कॉटन मिल और जरीब चौकी के पास अथर्टन मिल है। दर्शनपुरवा-फजलगंज स्थित लक्ष्मीरतन कॉटन मिल सालों पहले बंद है। अथर्टन मिल के एक हिस्से में एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर बनाया गया है। बीआईसी के अधीन लाल इमली, धारीवाल, कानपुर टेक्सटाइल और एल्गिन मिल एक और दो हैं। ये मिलें 66 एकड़ में बनी हैं।
बीआईसी-एनटीसी की संपत्तियां शहर के बेहद पॉश इलाकों में हैं। सिविल लाइंस, मकरावटगंज, वीआईपी रोड, ग्वालटोली, खलासी लाइन में मिलें और बंगले हैं। बीआईसी की ज्यादातर जमीनें नजूल की हैं, जो लीज पर दी गई हैं। लीज खत्म होने के साथ जिला प्रशासन उन पर कब्जा वापस ले रहा है। लाल इमली कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अजय सिंह ने बताया कि उम्मीद थी कि मिल पर प्रधानमंत्री कुछ बोलेंगे, लेकिन कुछ भी नहीं कहा। उन्होंने मांग की कि मिल के कर्मचारियों का जल्द से जल्द पूरा भुगतान कराया जाए। जल्द ही शहर के सांसद से मिलकर मिल चलाने की बात रखी जाएगी।
लीज होल्ड की जमीनें राज्य सरकार को जाएंगी वापस
सूत्रों का कहना है कि लीज होल्ड जमीनें राज्य सरकार को वापस की जाएंगी। बताया गया कि सरकार में कैबिनेट नोट पर चर्चा की जा रही है, जो प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के विचाराधीन है। पहले एनटीसी-बीआईसी को एक साथ बंद करने की रणनीति पर काम हो रहा था। एनटीसी की जमीनें कई राज्यों में होने और विधिक प्रक्रिया ज्यादा होने के चलते इसे बाद में बंद किया जा सकता है। बीआईसी को पहले बंद किया जा सकता है।
2013 से बंद है उत्पादन
बीआईसी के अधीन लाल इमली मिल में 2013 से उत्पादन बंद है। एनटीसी 344 करोड़ के घाटे में चल रही है। सूत्रों ने बताया कि, केंद्र एनटीसी, बीआईसी समेत नाै केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम को बंद कर सकता है। वित्त वर्ष 2024 से इनमें व्यावसायिक गतिविधि नहीं की जा रही है। बंदी के लिए कोई समय सीमा अभी तय नहीं की गई है।