चार हेक्टेयर जमीन पर लगाए 3000 पौधे, एक महीने बाद बचे तीन हरे
सरसौल ब्लॉक के फुफवार सुई थोक गांव में चारागाह की चार हेक्टेयर भूमि को कब्जों से मुक्त कराकर 12 जुलाई को 3000 पौधे लगाने का दावा किया गया था। इनमें 2000 पौधे पंचायती राज एवं विकास विभाग और 1000 गंगा टास्क फोर्स की ओर से लगाए गए। एक माह बाद तीन पौधे हरे-भरे मिले। अधिकांश पौधे या तो जानवर खा गए या सूख गए।
इंदलपुर में 500 पौधे लगे, न पानी मिला न जिंदगी बची
चौबेपुर ब्लॉक के इंदलपुर शिवराजपुर गांव के परिषदीय विद्यालय परिसर में पौधरोपण के लिए बीवीजी-रामजी योजना के तहत गड्ढे खोदे गए। इसके बाद यहां 500 से अधिक पौधे लगाए गए। बीडीओ समेत अन्य अधिकारियों ने पौधरोपण किया। डेढ़ माह बाद मौके पर एक भी पौधा नहीं बचा। ग्रामीणों के मुताबिक पौधे या तो सूख गए या जानवरों ने खा लिए।
गोशाला में 700 पौधे रोपे, अब सिर्फ सूखे डंडे बचे
शिवराजपुर क्षेत्र के बिलहन गांव की गोशाला में करीब 700 पौधे लगाए गए थे। अब मौके पर अधिकांश पौधे गायब हैं उनकी जगह सूखे डंडे खड़े हैं। ग्रामीणों के मुताबिक पौधे लगाने के बाद उनकी देखभाल के लिए कोई नहीं आया, जबकि पौधरोपण के समय जिलास्तरीय अधिकारियों ने संरक्षण की शपथ भी ली थी।
पशुनिस्तारण वाली जमीन पर लगाए पौधे, जानवरों ने किए खत्म
भीतरगांव ग्राम पंचायत के बाबूपुरवा मार्ग पर मृत पशु निस्तारण वाली सरकारी भूमि के किनारे जुलाई के पहले सप्ताह में करीब 35 फलदार पौधे लगाए गए। शुरुआत में पौधों में पत्तियां भी आने लगी थीं, लेकिन सुरक्षा के इंतजाम नहीं होने से जानवरों ने पत्तियां खा लीं और कई पौधे तोड़ दिए। ग्रामीणों के अनुसार करीब 28 पौधे खत्म हो गए।
ट्रॉली में आए 2000 पौधे, 100 लगाए, बाकी सूख गए
पतारा ब्लॉक के धरमपुर में रिंद नदी किनारे स्थित जंगलेश्वर मंदिर के पुजारी प्रेमपुरी ने बताया कि यहां पौधरोपण के लिए करीब 2000 पौधे ट्रॉली से लाए गए थे। लगभग 100 लगाए गए। बाकी एक जगह छोड़ दिए गए। एक माह बाद सूखने पर उन्हें रिक्शे से उठा ले जाया गया। टेनापुर गोशाला में भी 300 पौधे लगाए गए, जबकि मौके पर 50-60 ही मिले।
1500 कागजों में, जमीन पर करीब 300 पौधे
घाटमपुर ब्लॉक की भदरस ग्राम पंचायत में करीब 300 पौधे लगाए गए, जबकि कागजों में 1500 पौधे दिए जाने की बात सामने आई। करीब 1200 पौधे ग्रामीणों को वितरित किए गए। ग्राम समाज की जमीन पर लगाए पौधे बड़ी-बड़ी घास में दबे हैं। कुछ सूख चुके हैं। बारिश से जो पौधे अभी हरे हैं उन्हें भी घास से नहीं निकाला गया तो बचने की उम्मीद कम है।