आईआईटी कानुपर की ओर से आई टीम ने प्रोजेक्ट्स किए जज
वहीं, दूसरे कैमरा ट्रैफिक में मदद करेगा। अगर कोई गाड़ी हार्न दे रही है, तो व्यक्ति को दूर हटने की कमांड भी डिस्प्ले होगी। इस तकनीक का प्रदर्शन छात्रों ने संस्थान में लगे दो दिवसीय टेक्स-एक्सपो में किया। एक्सपो में एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन डीफाई, एआर-वीआर, आईओटी, हेल्थकेयर, साइबर सिक्योरिटी सहित अन्य तकनीकियों पर छात्राें ने प्राेजेक्ट एग्जिबिशन प्रतियोगिता में डिस्प्ले किया। जिसका शुभारंभ पीएसआईटी के ग्रुप निदेशक प्रो. मनमोहन शुक्ला ने किया। दो दिन चलने वाली प्रतियोगिता के दो दिन के प्रोजेक्ट को आईआईटी कानुपर की ओर से आई टीम ने जज किया। इस टीम के विजेता को एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।
सेंसर बताएगा होने वाला है जलभराव
बीटेक कंप्यूटर साइंस द्वितीय वर्ष के छात्रों ने तकनीक से युक्त वॉटर ड्रेनेज सिस्टम तैयार किया है। जलभराव, पाइप लाइन में लीकेज की रियल टाइम मॉनिटरिंग करेगा। बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र आराध्य, अरिषा, अर्पित, अनुराग, अर्जित और अरहान ने अल्ट्रा सोनिक सेंसर की मदद से जलभराव की स्थिति का पता लगेगा। पाइप लाइन का फ्लो कैसा है, आगे कैसा रहेगा, पाइप लाइन लीकेज है या नहीं, इसकी रियल टाइम मॉनिटरिंग होती रहेगी। हर पांच सेकेंड में डेटा अपडेट होता रहेगा। खास बात है कि जलभराव होने से पहले ही उस स्थान की डिटेल रिपोर्ट मिल जाएगी ताकि समय पर इसे सुधारा जा सके। इसके अलावा क्यूआर कोड की मदद हम किसी भी जगह से इसकी मॉनिटरिंग कर सकेंगे। यह सिस्टम स्मार्ट–सिटी ड्रेनेज नेटवर्क, नगर निगमों, हाउसिंग सोसायटी, इंडस्ट्रियल एरिया और बड़े कैंपस मैनेजमेंट के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।
मदर ड्रोन पर हमला करने से पहले जवाब देगा उसका बेबी ड्रोन
कंप्यूटर साइंस एआई ब्रांच के छात्र मोहम्मद रियान युनुस ने जेरिथ्रान वेक्टॉक्स ड्रोन तैयार किया है। यह एक हाई-टेक ऑटोनॉमस मिलिटरी ड्रोन है जिसमें निगरानी, इंटरसेप्शन और अटैक जैसी तीनों क्षमताएं मौजूद हैं। रियान ने अपने बड़े ड्रोन में छोटा बेबी ड्रोन फिट किया है। जो एक से 12 मीटर की दूरी पर हमलावर ड्रोन का पता लगाकर उसे या तो उसे डिफ्यूज या नष्ट कर देगा। ड्रोन में मल्टी-टारगेट ट्रैकिंग, रियल-टाइम वीडियो फीड, एंटी-जैमिंग सिस्टम और लंबी दूरी का कंट्रोल सिस्टम शामिल है, जिससे सिर्फ एक ऑपरेटर तीन से ज्यादा टारगेट्स को एक-एक कर अटैक कर सकता है। यह पूरी तरह भारतीय सेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। टीम में कर्णिका शर्मा, हर्ष बाजपेई, हनी द्विवेदी, मिथिलेश साहनी और नवीन शर्मा शामिल रहे।
ऑटोमेटिक एक्सीडेंट अलर्ट सिस्टम
रमनेश कुमार साहू, रितेश सिंह तथा रजनी तिवारी ने एसीसेंस आईओटी आधारित ऑटोमेटिक एक्सीडेंट अलर्ट सिस्टम तैयार किया है। इस डिवाइस की खास बात यह है कि यह सामान्य समय में बिल्कुल साइलेंट और अनट्रैक्ड रहता है यानी आपकी गाड़ी को कभी ट्रैक नहीं करता। लेकिन जैसे ही गाड़ी में तेज टक्कर होती है, यह सिस्टम अपने हाई-इंटेंसिटी वाइब्रेशन सेंसर या एयरबैग कंट्रोल यूनिट के ट्रिगर से तुरंत एक्टिव हो जाता है। इसके बाद यह तेजी से जीपीएस मॉड्यूल से आपकी सही लोकेशन निकालता है, साथ ही आग लगने या धुआं होने जैसी दूसरी खतरनाक स्थितियों को भी सेंसर से चेक करता है। सिर्फ कुछ सेकंड में यह सिस्टम आपकी लोकेशन, टाइम, व्हीकल आईडी और खतरे की स्थिति को जोड़कर एक पूरा डेटा पैकेट तैयार करता है और इसे पुलिस, हॉस्पिटल, फायर ब्रिगेड और आपके परिवार वालों तक सीधे भेज देता है। साथ ही डिवाइस में लगा तेज बजर और फ्लैशिंग लाइट्स आसपास मौजूद लोगों को भी सावधान कर देती हैं।