हैलट में जांच कराने में 24 घंटे लगते हैं
डॉ. काला ने बताया कि जब रोगी ने कहा कि जांचें यहां भी होतीं तो डॉक्टर ने कहा कि बहस मत करो, जाओ यहां से, पहले जांच कराओ। इसी तरह एक रोगी दीपक को भी बाहर से जांच कराने के लिए कहा गया। उससे डॉक्टर ने कहा कि हैलट में जांच कराने में 24 घंटे लगते हैं। बाहर आधा घंटे में रिपोर्ट मिल जाएगी। उन्होंने बताया कि रोगी को ऐसी इमरजेंसी भी नहीं थी। बाद में साधना की डॉ. जेएस कुशवाहा से जांच करा दी। दूसरे रोगी ने न्यूरोलॉजी में जांच कराई है। रोगियों को दवाएं भी अस्पताल से दी गईं।
पहले भी पकड़ी जा चुकी डॉक्टर की गड़बड़ी
डॉ. काला ने बताया कि डॉ. ब्रजेश कुमार की तैनाती आजमगढ़ में है, वह यहां अटैच हैं। इससे पहले भी उनकी गड़बड़ी पकड़ी गई थी। इस पर अटैचमेंट खत्म करने के लिए पत्र लिखा। अब फिर पत्र भेजेंगे। यह आपराधिक कृत्य है। कड़ी विभागीय कार्रवाई होगी। डॉक्टर के खिलाफ शिकायतें बहुत हैं। पहले भी चेतावनी दी गई है। जिंदा रोगी को मुर्दा घोषित करने वाली घटना भी उन्हीं की यूनिट की है।
34 नंबर में भेजा था रोगी को
सीनियर फिजीशियन डॉ. ब्रजेश कुमार ने मामले के संबंध में बताया कि उन्होंने रोगी को पैथोलॉजिकल जांच के लिए 34 नंबर कमरे में भेजा था। वे पता नहीं कहां भटक गए। पर्चे पर अपना नंबर भी लिख दिया कि वहां जाकर हमारी बात करा देना। रोगियों को गलतफहमी हो गई।
पहले भी सामने आ चुके निजी पैथोलॉजियों से सांठगांठ के मामले
पैथोलॉजियों के एजेंटों के हैलट आने वाले रोगियों को ठगने के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। कुछ दिन पहले पैथोलॉजी के एजेंट ने सर्जरी विभाग में भर्ती रोगी को फर्जी हेपेटाइटिस सी निगेटिव रिपोर्ट दी थी। एजेंट ने माइक्रोबायोलॉजी विभाग जाते वक्त तीमारदार को बरगलाया और आधा घंटे में कंप्यूटर से निकाल कर फर्जी रिपोर्ट दे दी।
निजी पैथोलॉजियों के कार्ड मिले थे
बीते साल दिसंबर में वार्ड में रोगियों का ब्लड सैंपल लेने आए दलाल को मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने पकड़ा था। दिसंबर में ही पैरा मेडिकल कोर्स कर रहे छात्र को संदिग्ध हालत में हैलट की पैथोलॉजी में पकड़ा गया था। वह रोगियों को झांसा दे रहा था। इसके अलावा शिकायत पर मल्टी सुपर स्पेशियलिटी के आउटसोर्सिंग कर्मचारी पकड़े गए। प्राचार्य ने डॉ. काला को उनके पास से निजी पैथोलॉजियों के कार्ड मिले थे।