मनरेगा विभाग को करना था मजदूरी का भुगतान
इसमें दो लाख रुपये बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को देने थे। दो लाख रुपये पंचायतीराज विभाग को और शेष आठ लाख रुपये मनरेगा से खर्च होने थे। दोनों विभागों ने धनराशि ग्राम पंचायतों को जारी कर दी थी, लेकिन मजदूरी का भुगतान मनरेगा विभाग को करना था।
कुल 25 केंद्रों का निर्माण ही पूरा हो सका
वर्ष 2023 में 58 केंद्रों के लिए पैसा जारी किया गया था, जिसमें से केवल 22 ही बन सके। इसके बाद वर्ष 2024-25 में 151 केंद्रों के लिए पैसा जारी हुआ, लेकिन इनमें से सिर्फ तीन ही बन पाए। इस प्रकार, तीन वर्षों में कुल 25 केंद्रों का निर्माण ही पूरा हो सका है। 69 केंद्रों की नींव आज तक नहीं भरी जा सकी है।
केंद्रों का निर्माण अभी और अधिक विलंबित होने की संभावना
निर्माण कार्यों की मासिक बैठकों में सचिव से लेकर बीडीओ तक को कई बार नोटिस जारी किए गए। हालांकि, केंद्रों का निर्माण कार्य फिर भी पूरा नहीं हो सका। जब जवाबदेही तय करने की बात आई, तो जिम्मेदार अफसरों ने मनरेगा से पैसा न मिलने को देरी का मुख्य कारण बताया। अब प्रधान भी अपने कार्यकाल समाप्त होने के कारण निर्माण कार्य कराने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इन केंद्रों का निर्माण अभी और अधिक विलंबित होने की संभावना है।
बाल विकास और पंचायती राज विभाग की तरफ से दी जाने वाली धनराशि ग्राम पंचायतों के खाते में भेज दी गई है। अभी तक 25 केंद्रों का ही सिर्फ निर्माण पूरा हो सका है। अन्य की भी कार्य प्रगति में है, जल्द वो भी निर्माण पूरे होंगे। -प्रीती सिंहा, जिला कार्यक्रम अधिकारी