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Kanpur: दुबलेपन की दीवानगी में गले पड़ा कुपोषण, हर महीने 200 युवतियां पहुंच रहीं हैलट, डॉक्टरों ने दी ये सलाह

Thu, 07 May 2026 11:36 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: कानपुर में सोशल मीडिया से प्रभावित होकर क्रैश डाइटिंग करने वाली हर महीने 200 युवतियां कुपोषण और गंभीर एनीमिया का शिकार होकर हैलट पहुंच रही हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि बिना सलाह खाना छोड़ना भविष्य में बांझपन और हड्डियों की कमजोरी जैसी लाइलाज बीमारियां दे सकता है।
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इंटरनेशनल नो डाइड डे - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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दुबले शरीर को ही सुंदर मानने की धारणा युवतियों को कुपोषित कर रही है। सोशल मीडिया और रील कल्चर से प्रभावित होकर युवतियां तेजी से वजन घटाने के लिए क्रैश डाइट अपना रही हैं। इंटरनेशनल नो डाइट डे पर सामने आए आंकड़े के अनुसार हर महीने औसत ऐसी 200 युवतियां कुपोषण का शिकार और बीमार होकर हैलट पहुंच रही हैं। संतुलित आहार न लेने से युवतियों को गंभीर एनीमिया, चक्कर, कमजोरी और मासिक धर्म में गड़बड़ी जैसी समस्याएं हो रही हैं।

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हैलट ओपीडी में आने वाले इन युवाओं में एक बात सामान्य पाई गई। वजन घटाने के लिए अधिकतर ने रात का खाना छोड़ रखा था। डॉक्टरों के अनुसार रात में भोजन न करने से शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और आवश्यक पोषक तत्वों की कमी होने लगती है। इससे वजन घटने के बजाय शरीर कमजोर और बीमार हो जाता है। मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, डाइटिंग की वजह से कुपोषण के शिकार युवाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर पांच से सात ग्राम तक गिर रहा है।

पतला होना और फिट होना अलग-अलग है
यह गंभीर एनीमिया की श्रेणी में आता है। खाना न खाने से स्वभाव में चिड़चिड़ापन और अवसाद के लक्षण दिखने लगे हैं। मेडिसिन विभाग के डॉ. विशाल गुप्ता ने बताया कि पतले दिखने की होड़ में युवा क्रैश डाइट को अपना रहे हैं। कम समय में अधिक वजन कम करने की कोशिश में कैलोरी की मात्रा अचानक और बड़े स्तर पर घट जाती है। इससे शरीर में आवश्यक तत्वों की कमी हो रही है। कमजोरी आने के साथ मांसपेशियां भी कमजोर हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि पतला होना और फिट होना अलग-अलग है।

गंभीर समस्याओं को दे सकता है जन्म
हर स्वस्थ व्यक्ति को 1500 से 1800 किलो कैलोरी लेनी चाहिए। ज्यादा शारीरिक श्रम करने वालों को इससे ज्यादा कैलोरी लेनी चाहिए। क्रैश डाइट में लोग 600 से 800 कैलोरी घटाकर कर रहे हैं। हैलट जच्चा-बच्चा अस्पताल की डॉ. उरूज जहां ने बताया कि महिलाएं पतले होने के लिए खाना छोड़ दे रही हैं। इससे उनका हीमोग्लोबिन सात तक पहुंच रहा है। यह भविष्य में बांझपन और हड्डियों के खोखलेपन जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है। कुपोषण का अर्थ शरीर में आवश्यक कैलोरी और अन्य आवश्यक तत्वों की कमी होना है।
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संतुलित आहार अपनाने की सलाह
  • रात का भोजन बिल्कुल न छोड़ें, हल्का और पचने लायक खाना जैसे दलिया, खिचड़ी या सूप लें।
  • डाइट में पनीर, दालें, सोयाबीन और हरी सब्जियां शामिल करें।
  • बिना विशेषज्ञ की सलाह के किसी भी तरह की डाइटिंग न करें।
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