दुबले शरीर को ही सुंदर मानने की धारणा युवतियों को कुपोषित कर रही है। सोशल मीडिया और रील कल्चर से प्रभावित होकर युवतियां तेजी से वजन घटाने के लिए क्रैश डाइट अपना रही हैं। इंटरनेशनल नो डाइट डे पर सामने आए आंकड़े के अनुसार हर महीने औसत ऐसी 200 युवतियां कुपोषण का शिकार और बीमार होकर हैलट पहुंच रही हैं। संतुलित आहार न लेने से युवतियों को गंभीर एनीमिया, चक्कर, कमजोरी और मासिक धर्म में गड़बड़ी जैसी समस्याएं हो रही हैं।
हैलट ओपीडी में आने वाले इन युवाओं में एक बात सामान्य पाई गई। वजन घटाने के लिए अधिकतर ने रात का खाना छोड़ रखा था। डॉक्टरों के अनुसार रात में भोजन न करने से शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और आवश्यक पोषक तत्वों की कमी होने लगती है। इससे वजन घटने के बजाय शरीर कमजोर और बीमार हो जाता है। मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, डाइटिंग की वजह से कुपोषण के शिकार युवाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर पांच से सात ग्राम तक गिर रहा है।