चक्कर आना, पैर की पिंडलियों में ऐंठन, पैर और हाथ के पंजों में झनझनाहट, झटके लगना आदि लक्षण हैं। इनकी हिस्ट्री से पता चला है कि अधिकतर स्ट्रेस का शिकार हैं। इससे उनके अंदर सिगरेट और तंबाकू की लत बढ़ी है। कुछ रोगी रात में एक घंटे ही सो पा रहे हैं।
इनमें आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोग भी शामिल हैं। पुरुषों में यह दिक्कत अधिक है। महिलाओं में अधेड़ आयु वर्ग की रोगियों को यह दिक्कत है। डॉ. गणेश शंकर का कहना है कि देर से सोने को न्यू नॉर्मल श्रेणी में शामिल किया गया।
मोबाइल और लैपटॉप ने बदली आदत
मोबाइल फोन और लैपटॉप पर देर रात तक चैटिंग करने की आदत ने नींद की अवधि प्रभावित की है। मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय चौधरी का कहना है कि अब रात 12 बजे तक जागना असामान्य नहीं माना जाता है। लोगों को सुबह काम से उठना पड़ता है जिससे नींद पूरी नहीं हो पाती। बाद में यही स्थिति दिक्कत पैदा करती है।