कानपुर में कोरोना के डर से बरती गई सावधानी कोरोना के साथ मलेरिया को भी शहर से कम कर गई, लेकिन कोरोना के खत्म होते ही की गई लापरवाही ने मलेरिया के मामले फिर से बढ़ा दिए हैं। पिछले छह साल में साढ़े सात गुना मलेरिया रोगी बढ़े हैं। स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार 2020 में 17, 2021 में 15, 2022 में 8, 2023 में 43 और 2024 में 128 मामले दर्ज हुए हैं। वहीं, 2025 से अब तक 222 से ज्यादा मामले आ चुके हैं।
विभाग के मुताबिक 2024 के आंकड़ें जिसमें 128 संख्या है। इसमें से करीब 78 रोगी दूसरे राज्यों में रहकर काम कर रहे हैं और उन्हें वहीं पर मलेरिया हुआ है। आधारकार्ड में उनका पता कानपुर लिखा होने के चलते अब नए नियमों के अनुसार पोर्टल पर ये केस कानपुर ही रेफर कर दिए जाते हैं। इसलिए संख्या में इतना इजाफा हुआ है। वहीं कोरोना से पहले भी मलेरिया रोगियों की संख्या अधिक थी, जिसमें 2018 में मलेरिया के 403 मामले और 2019 में 426 मामले आए थे।
घर और आसपास का वातावरण हमेशा साफ सुथरा रखें
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी ने बताया की मलेरिया के मामले में कमी आई है। उन्होंने कहा मलेरिया के लक्षण मिलने पर खुद उपचार करने से बचते हुए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में मलेरिया जांच व उपचार कराएं। इसके साथ ही अपने घर और आसपास का वातावरण हमेशा साफ सुथरा रखें। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के डॉ. विशाल गुप्ता ने बताया कि मच्छर के काटने के 14 से 21 दिन के अंदर तेज बुखार, कपकपी, भूख कम हो जाती है।
कई बार एक ही दिन बुखार आता है
बुखार उतरने के बाद खूब पसीना आना और तेज सिर दर्द होना आदि मलेरिया के लक्षण हैं। लक्षण दिखते ही बिना देरी के जांच कराएं और पाजिटिव होने पर तुरंत इलाज कराएं। पीवी (प्लाजमोडियम वायवेक्स) होने पर बुखार आता रहता है, जबकि पीएफ (प्लाजमोडियम फेल्सीपेरम) ज्यादा खतरनाक है। इसमें कई बार एक ही दिन बुखार आता है और उसके बाद पता भी नहीं चलता और ये अंदर ही अंदर लिवर, किडनी तक को प्रभावित कर सकता है। इसलिए जांच तुरंत कराएं।
हर सप्ताह कूलर का पानी बदल दें
रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग अवश्य करें। अपने आसपास गंदगी न करें। घर के आसपास जल भराव न होने दें। सुबह और शाम फुल आस्तीन के कपड़े पहने ताकि मच्छर न काट सकें। प्रति सप्ताह कूलर और फ्रिज का पानी बदल दे| छत के ऊपर पड़े बिना प्रयोग वाले बर्तन जिनमें पानी का ठहराव हो सकता है, हटा दें। पशुबाड़े में यदि हौदे में पानी भरा है तो उसे एक हफ्ते में अवश्य बदल दें। यदि जानवर नहीं है तो उस हौदेको ही पलट दें, ताकि उसमें पानी न रुक सके।
कोरोना से बचाव में की गई कार्रवाई में मच्छरों से भी बचाव हुआ है। इस बार भी हम अभियान चला रहे हैं। हमारा लक्ष्य शून्य मामले करना है, जिसे हम अभियान चलाकर पूरा करेंगे। -डॉ. हरिदत्त नेमी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी