दूसरी लहर के दौरान सीएमओ कार्यालय से जारी होने वाले आंकड़ों में हैलट के न्यूरो साइंसेज और मैटरनिटी विंग कोविड अस्पताल में बेड खाली दिखाए जाते रहे। जब कोविड कमांड सेंटर से रोगी भेजे जाते तो पता चलता कि सारे बेड भरे हैं।
कोरोना की दूसरी लहर में बेड के लिए भटकते-भटकते कई मरीजों की जान चली गई थी। इसी खामी को दूर करते हुए हैलट में ऐसा सिस्टम बनाया गया है जिसमें हर आधे घंटे में बेड खाली होने की रिपोर्ट दी जाएगी। जब भी बेड खाली होगा, उसे वार्ड की शीट पर दर्शा दिया जाएगा जिससे सभी को बेडों की सही स्थिति पता रहे।
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दूसरी लहर के दौरान सीएमओ कार्यालय से जारी होने वाले आंकड़ों में हैलट के न्यूरो साइंसेज और मैटरनिटी विंग कोविड अस्पताल में बेड खाली दिखाए जाते रहे। जब कोविड कमांड सेंटर से रोगी भेजे जाते तो पता चलता कि सारे बेड भरे हैं। यही स्थिति कोविड स्टेटस पाने वाले निजी अस्पतालों की थी।
जीएसवीएम मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि भ्रम की स्थिति को दूर करने के लिए नई व्यवस्था बनाई गई है। अनेस्थेसिया विभाग में कंट्रोल रूम बनाया गया है। पहले यह प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक के कक्ष में था। साथ ही यहां रियल टाइम बेड रिपोर्ट दी जाएगी।
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यहां संपर्क साधन उपलब्ध रहेंगे जिनके जरिये सीएमओ बेड की रियल टाइम स्थिति पता कर सकते हैं। अस्पताल में लोग आएंगे उन्हें पता चल जाएगा कि कौनसा बेड खाली है। कोविड अस्पतालों का सिस्टम गूगल से जुड़ा रहेगा जिससे लोग जानकारी हासिल कर सकेंगे।