गर्मी में परिवार के साथ घूमने का प्लान बना रहे शहरियों को ट्रेनों में आरक्षण नहीं मिल रहा है। नियमित ट्रेनें अगले दो माह तक फुल होने के साथ ही नो-रूम भी हैं। विभिन्न रूटों पर चलाई गई करीब 40 जोड़ी ट्रेनों के साथ ही स्पेशल ट्रेनों में भी जगह नहीं मिल पा रही है।
मई-जून में स्कूलों की ग्रीष्मकालीन छुट्टियां होती हैं। इस अवधि में ज्यादातर लोग परिवार के साथ घूमने का प्लान बनाते हैं। सबसे ज्यादा लोग हरिद्वार, नैनीताल, जम्मू, मुंबई, पंजाब, उज्जैन, द्वारिका, या फिर नई दिल्ली जाना पसंद करते हैं। उनके इस प्लान पर ट्रेनों की लंबी वेटिंग ब्रेक लगा रही हैं। कई लोग तो प्लान कैंसल कर रहे हैं जबकि कुछ लोग टुकड़ों में यात्रा करने के लिए विवश हैं। अधिकतर ग्रीष्मकालीन स्पेशल ट्रेनों में यही स्थिति है। कुछ ही घंटों में अधिकांश सीटें फुल हो जाती हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में यात्रियों को वेटिंग का टिकट लेना पड़ता है और बाद में यात्रा से एक-दो दिन पहले टिकट कनफर्म न होने पर बुकिंग कैंसिल करानी पड़ती है। कानपुर सेंट्रल स्टेशन, गोविंदपुरी, रावतपुर और कल्याणपुर स्टेशनों के टिकट काउंटरों पर रोजाना भीड़ उमड़ रही है।
यह है हाल
कानपुर से हरिद्वार जाने वाली 14113 सूबेदारगंज-देहरादून एक्सप्रेस, 02191 हरिद्वार फेस्टिवल स्पेशल में तीन मई से लेकर अगले माह तक स्लीपर, एसी द्वितीय या तृतीय में सीटें नहीं हैं। कई तारीखों पर तो नो-रूम भी दिखा रहा है। इसी तरह, नैनीताल जाने वाली 15073 त्रिवेणी एक्सप्रेस, 12255 गरीबरथ एक्सप्रेस, 18309 संबलपुर-जम्मू तवी एक्सप्रेस, 18101 टाटा जम्मू एक्स्प्रेस, मुंबई जाने वाली 22537 कुशीनगर एक्सप्रेस, 19038 अवध एक्सप्रेस सहित 21 ट्रेनों, दिल्ली जाने वाली श्रम शक्ति, पूर्वा एक्सप्रेस, प्रयागराज एक्सप्रेस सहित अन्य ट्रेनों में भी यही हाल है। उत्तर मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि नियमित ट्रेनों में जगह न होने के कारण ग्रीष्मकालीन स्पेशल ट्रेनों का समय-समय पर संचालन किया जा रहा है। जल्द ही विभिन्न रूटों पर और विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी।
तत्काल से भी राहत नहीं
इस स्थिति में लोग तत्काल या वीआईपी कोटे का सहारा ले रहे हैं। सभी ट्रेनों की सुबह इस बजे से तत्काल टिकट बुकिंग शुरू होती है जो 11 बजे तक रहती है। इस अवधि में टिकट काउंटरों पर अधिक भीड़ रहती है लेकिन तत्काल कोटा खुलते ही चंद मिनट में ही सीटें फुल होती और कई यात्रियों को बैरंग लौटना पड़ता है। बता दें कि, ट्रेनों में तत्काल की करीब दस प्रतिशत तक सीटें ही होती हैं। एक यात्री को एक फॉर्म पर सिर्फ चार सीटें मिल सकती हैं।