घिमऊ क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य के लिए चुनाव लड़ चुके प्रभाकर अवस्थी पहले की तैयारियों के बारे में बताते हैं, पिछली बार एक प्रत्याशी को विकास दुबे ने फोन करके बोल दिया कि नहीं लड़ना है, तो उन्होंने नाम वापस ले लिया। इस बार के चुनावों में आदमी स्वतंत्र होकर वोट करेगा। विकास दुबे कभी ऐसे चुनाव लड़ा ही नहीं कि हाथ जोड़ कर वोट मांगा हो। उसके यहां तो पुलिसवाले भी बांध के मारे जाते थे।
ग्राम समाज की जमीन पर उनके लोगों का कब्जा था, कोई बोलता ही नहीं था। प्रभाकर आगे बताते हैं, पिछली बार जब उसकी पत्नी ऋचा दुबे जीतीं थीं, 346 बैलट जिन पर प्रिसाइडिंग अफसर के साइन भी नहीं थे, उनके नाम से वोट पड़े थे। काउंटिंग में 120% वोट पड़ गए आखिर कैसे? प्रशासन उसके इशारों पर नाचता था।
हम रात तक मतगणना स्थल पर डटे रहे, लेकिन हमारे पिता जी ने कहा-बेटा जिंदा रहोगे तो फिर चुनाव लड़ पाओगे। हमें तो धमकी नहीं दी कभी, लेकिन हमारे लोगों को धमकाते थे कि बस्ता मत लगाना कभी। जो मेरे समर्थन में आ जाता था उसकी शामत आ जाती थी।