21 मई 1926 को बना क्लब बढ़ाता रहा शहर का मान
अपने शहर में फुटबॉल का खेल क्रिक्रेट जितना लोकप्रिय नहीं है। फिर भी यह क्लब फुटबॉल की विरासत को भलीभांति संभाले और संवारे है। क्लब ने अपने सौ वर्ष के सफर में न जाने कितनी युवा प्रतिभाओं को नई पहचान दिलाई। 21 मई 1926 को बना यह क्लब आज भी फुटबॉल के प्रेमी खिलाडि़यों के सपनों को पंख लगा रहा है। क्लब से निकले कई खिलाड़ियों ने जिला, मंडल, प्रदेश और देश स्तरीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर कानपुर का मान बढ़ाया है।
कैंटोनमेंट फुटबॉल क्लब की ओर से जीते गए टूर्नामेंट की यादें
- फोटो : amar ujala
अभी 50 खिलाड़ी ले रहे हैं निशुल्क प्रशिक्षण
इस समय क्लब में करीब 50 खिलाड़ी नियमित रूप से निशुल्क प्रशिक्षण ले रहे हैं। क्लब का अपना मैदान कैंट स्थित आजाद पार्क में है। इसे वर्ष 2010 में विकसित किया गया था। यहां शहर की फुटबॉल प्रतिभाओं को तराशने के लिए नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। क्लब की मेहनत के कारण ही पिछले साल अनस और यूसुफ का चयन स्पोर्ट्स कोटे के माध्यम से स्पोर्ट्स कॉलेज में हो सका।
सदस्य उठाते हैं मैदान के रखरखाव व खिलाड़ियों की जरूरतों का खर्च
क्लब की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि उसे आर्थिक संसाधनों की कमी से जूझना पड़ रहा है। क्लब सदस्य अमित नारंग ने बताया कि स्पॉन्सरशिप आसानी से नहीं मिलती। इससे मैदान के रखरखाव से लेकर खिलाड़ियों की जरूरतों तक का खर्च सदस्यों को स्वयं उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कई प्रतियोगिताओं के आयोजन में नार्थ स्टार हॉस्पिटल, रेविटॉस और गुरु कृपा स्पोर्ट्स समय-समय पर सहयोग करते हैं। इससे खिलाड़ियों को थोड़ी-बहुत राहत मिलती रहती है।
कैंटोनमेंट फुटबॉल क्लब की ओर से जीते गए टूर्नामेंट की यादें
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सौ साल में इनके हाथ रही क्लब की कमान
एक शताब्दी के सफर में क्लब की कमान कई अनुभवी खेल प्रेमियों ने संभाली और संस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। शुरुआत मोहम्मद इशाक ने की। इन्होंने वर्ष 1926 से 1944 तक क्लब का नेतृत्व किया। इसके बाद मोहम्मद बशीर ने 1944 से 1973 तक क्लब को नई दिशा दी। वर्ष 1973 से 1993 तक मोहम्मद उमर अख्तर ने क्लब की जिम्मेदारी संभाली। गुलजार अहमद ने 1993 से 1998 तक सचिव पद पर रहते हुए फुटबॉल गतिविधियों को आगे बढ़ाया। इसके बाद सोहेल अख्तर अंसारी ने 1999 से 2016 तक क्लब का संचालन किया। वर्तमान में सचिव आसिफ इकबाल युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने में जुटे हैं।
क्लब ने जीतीं ये ट्राफियां
क्लब ने शहर में 1944 में खेले गए ऑल इंडिया करन स्मारक फुटबॉल टूर्नामेंट की ट्रॉफी जीती। 1951 में आजमगढ़ में द ऑल इंडिया एमएयू फुटबॉल टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम किया। शहर में 1969 में हाफिज हलीम मेमोरियल फुटबॉल टूर्नामेंट का खिताब जीता।
कैंटोनमेंट फुटबॉल क्लब की ओर से जीते गए टूर्नामेंट की यादें
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क्लब के खिलाडि़यों ने किया कई संस्थानों का प्रतिनिधित्व
कैंटोनमेंट फुटबॉल क्लब ने कई ऐसे खिलाड़ी दिए, जिन्होंने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कानपुर का परचम लहराया। मोहम्मद बशीर ने आईआईटी में कोच के रूप में अपनी पहचान बनाई, जबकि मोहम्मद तौफीक रेलवे से जुड़े। अजीजुर्रहमान ने स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री, फिरोज अहमद केस्को में कार्यरत और रईस अहमद व आसिफ इकबाल ने आरबीआई का प्रतिनिधित्व किया।
इन्होंने दिखाया राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में दम
शहर के फुटबॉल खिलाड़ियों ने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराज्यीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। फिरोज अहमद, अमित नारंग और अमित कुमार ने वर्ष 2010-11 में बहराइच में आयोजित अंडर-21 इंटर स्टेट फुटबॉल टूर्नामेंट में उपविजेता टीम के सदस्य के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अलावा वर्ष 2013 में मऊ में आयोजित ऑल इंडिया फुटबॉल टूर्नामेंट में टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया, जहां यूपी पुलिस की मजबूत टीम से हारकर उपविजेता रही। आसिफ इकबाल ने वर्ष 1998 में सीनियर नेशनल फुटबॉल प्रतियोगिता संतोष ट्रॉफी में प्रतिभाग कर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया।
टीम को खिताब दिलाने में निभाई अहम भूमिका
साथ ही, वर्ष 2006 में सतना में आयोजित ऑल इंडिया फुटबॉल टूर्नामेंट में अपनी टीम को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। वर्तमान में उत्तर प्रदेश सलेक्शन कमेटी में सदस्य भी हैं। शैलेंद्र कुमार रावत ने वर्ष 2010 में रेनो कोट सीनियर स्टेट फुटबॉल चैंपियनशिप में हिस्सा लिया, जिसमें उनकी टीम उपविजेता रही। वर्ष 2001 में उन्होंने हल्द्वानी में आयोजित अंडर-19 फुटबॉल चैंपियनशिप में प्रतिभाग किया। इसके अलावा वर्ष 1995 से 2000 तक वह उत्तराखंड स्पोर्ट्स कॉलेज के खिलाड़ी रहे और स्कूल नेशनल प्रतियोगिताओं में भी अपने खेल का प्रदर्शन किया।
यह क्लब केवल एक संस्था नहीं बल्कि कानपुर की फुटबॉल संस्कृति की मजबूत नींव है। इसने पीढ़ियों तक खिलाड़ियों को मंच और पहचान देने का काम किया है। -अजीत सिंह, सचिव, जिला फुटबॉल संघ