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Kanpur: पांच सर्जरी और 100 से अधिक टांकों से कैंसर को हराया, अब बैडमिंटन में जीत रहे पदक, पढ़ें नीरज की कहानी

Fri, 20 Mar 2026 09:54 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: कानपुर के नीरज शुक्ला ने 10 साल तक मुख कैंसर और पांच बड़ी सर्जरी को झेलने के बाद नेशनल मास्टर गेम्स में बैडमिंटन का कांस्य पदक जीता है। उनका यह संघर्ष और खेल के प्रति जुनून अब युवाओं के लिए मिसाल बन गया है।
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नीरज शुक्ला - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में 10 वर्षों तक मुख कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से संघर्ष करने वाले 51 वर्षीय नीरज शुक्ला अब खेल के मैदान में अपनी नई पहचान बना रहे हैं। 27 से 31 जनवरी तक पुणे में आयोजित आठवें नेशनल मास्टर गेम्स की बैडमिंटन चैंपियनशिप में नीरज ने उत्तर प्रदेश की टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए कांस्य पदक जीता। पांच बड़ी सर्जरी और 100 से अधिक टांकों के दर्द को झेलने के बावजूद नीरज का जज्बा और हौसला आज भी अटूट है।

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उनका संघर्ष और वापसी देशभर के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन रही है। पांडुनगर निवासी नीरज को वर्ष 2015 में मुख के कैंसर का पता चला था। इसके बाद 2016, 2019, 2021 और 2025 में उन्हें पांच जटिल सर्जरी से गुजरना पड़ा। इन सर्जरी के निशान और दर्द आज भी उनकी जिंदगी का हिस्सा हैं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। डॉक्टरों की सलाह पर रिकवरी के लिए बैडमिंटन की ओर बढ़ने वाले नीरज ने अब इसी खेल में अपना भविष्य तलाशना शुरू कर दिया है।

मित्र प्रणय ने कठिन समय में दी हिम्मत
लगभग दो माह बाद होने वाले नेशनल मास्टर गेम्स में डबल्स मुकाबले में उनके साथ अनुभवी खिलाड़ी प्रणय द्विवेदी कोर्ट साझा करेंगे। प्रणय के अनुसार नीरज गैंजेज क्लब के बैडमिंटन कोर्ट पर कड़ी मेहनत कर रहे हैं और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। नीरज बताते हैं कि रामकृष्ण मिशन स्कूल के उनके मित्र प्रणय ने ही उन्हें कठिन समय में हिम्मत दी और बंद कमरे से बाहर निकलकर अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए प्रेरित किया।
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अपनी लगन और प्रतिभा से लोगों को कर रहे हैं प्रेरित
इसी प्रेरणा के बल पर उनका चयन नेशनल मास्टर गेम्स के लिए संभव हो सका। नीरज अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां कांति शुक्ला और पत्नी छाया को देते हैं। उनका कहना है कि बीते 10 वर्षों के संघर्ष में दोनों ने उन्हें कभी टूटने नहीं दिया। आज उन्हीं के सहारे वह फिर से खड़े होकर नई शुरुआत कर रहे हैं और खेल के मैदान में अपनी लगन और प्रतिभा से लोगों को प्रेरित कर रहे हैं।
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