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Kanpur: मूंगफली की फर्म बना 2.66 करोड़ की ITC का लिया लाभ, एक गिरफ्तार और दो पहले जा चुके हैं जेल, पढ़ें मामला

Fri, 20 Mar 2026 09:05 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: कानपुर में फर्जी फर्मों के जरिए 2.66 करोड़ रुपये का अवैध आईटीसी लाभ लेने वाले आरोपी दीपक उर्फ मोगली को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में मूंगफली के व्यापार के नाम पर फर्जी फर्मों से लेनदेन दिखा 2.66 करोड़ के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लेने में एक और आरोपी गिरफ्तार हो गया है। उसे शुक्रवार को क्राइम ब्रांच ने सीओडी क्रॉसिंग से पकड़ा है। इससे पूर्व गिरोह में शामिल दो सदस्यों को जेल भेजा जा चुका है। पुलिस और क्राइम ब्रांच अन्य आरोपियों की तलाश में जुट गई है।

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डीसीपी क्राइम श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि राज्य कर विभाग ने फरवरी में कल्याणपुर थाने में फर्जी फर्मों के नाम पर आईटीसी का अवैध तरीके से लाभ लेने की एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस और क्राइम ब्रांच ने अपूर्वा ट्रेडिंग कंपनी के नाम से संचालित फर्म की जांच की। उसके मेहरबान सिंह का पुरवा स्थित पते का सत्यापन कराया गया, जिसमें किसी तरह की व्यापारिक गतिविधि संचालित होते नहीं मिली।

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आरोपी को सीओडी क्रॉसिंग से गिरफ्तार किया

फर्म से संबंधित मोबाइल नंबर भी निष्क्रिय था। डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से फर्म बोगस निकली, जिसके संचालको की ओर से फर्जी दस्तावेंजों के सहारे अवैध तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने की जानकारी हुई। फर्म ने 2019-20 में 2.66 करोड़ का लाभ लिया। पुलिस ने कमल गौरव साहू और एतिशाम हुसैन को पहले ही जेल भेज दिया था, जबकि शुक्रवार को दीपक कुमार उर्फ मोगली को सीओडी क्रॉसिंग से गिरफ्तार किया। मोगली को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेजा गया।
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जानकारी देते पुलिस अधिकारी - फोटो : amar ujala
इस तरह करते थे खेल
डीसीपी क्राइम के मुताबिक गिरोह फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली बिल, किरायानामा जैसे कूटरचित दस्तावेज तैयार कराते थे। इन के आधार पर उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में फर्जी जीएसटी फर्मों का पंजीकरण कराया जाता था। आरोपी वास्तविक व्यापार किए बिना केवल कागजों में माल की खरीद-फरोख्त दर्शाकर फर्जी इनवॉइस एवं ई-वे बिल तैयार करते थे। इन लेन-देन के आधार पर आईटीसी का गलत तरीके से क्लेम कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया जाता था। गिरोह में कई लोग कमीशन के आधार पर फर्म रजिस्ट्रेशन, बैंक खाता संचालन, बिलिंग एवं रिटर्न फाइलिंग का कार्य करते थे।
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