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कानपुर नगर निगम: अब कागजों में चल रही भ्रष्टाचार की जांच, जेल भेजे गए ठेकेदारों को जमानत, सीपी ने कही ये बात

Tue, 29 Sep 2026 11:25 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: कानपुर नगर निगम में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई अब सुस्त पड़ती दिख रही है। मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बाद गठित चार सदस्यीय एसआईटी की जांच पिछले एक महीने से सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गई है।
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कानपुर नगर निगम - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई थम सी गई है। एक माह से चार सदस्यों की एसआईटी सिर्फ जांच के नाम पर कागज भर रही है। पहले दिन दर्ज पांच एफआईआर के बाद छठवीं प्राथमिकी अब तक दर्ज नहीं हो सकी। वहीं, जिन तीन ठेकेदारों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी फजलगंज थाने में दर्ज हुई थी उनमें दो की जमानत हो गई जबकि एक ने अपनी गिरफ्तारी पर स्टे भी ले लिया है।

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बीते माह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मुख्यमंत्री ने नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। पुलिस ने भी तेजी दिखाते हुए टेंडर में धांधली करने वाले और डरा-धमकाकर टेंडर हथियाने वाले ठेकेदारों के खिलाफ स्वरूपनगर थाने में चार और फजलगंज में एक प्राथमिकी दर्ज कराई थी। फजलगंज वाली प्राथमिकी के तहत दो ठेकेदारों रज्जन बाजपेई और संदीप जैन को धांधली और रंगदारी मांगने के आरोप में जेल भी भेजा गया।

अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए
फिलहाल दोनों आरोपी जमानत पर बाहर हैं। धांधली से टेंडर बांटने का मुख्य आरोपी आगरा का ठेकेदार गोविंद शर्मा कुछ दिन फरार रहा। फिर गिरफ्तारी का स्टे लेकर पुलिस की पहुंच से दूर चला गया है। दूसरी ओर एसआईटी गठित कर नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार की जांच शुरू कराई गई। जांच के दौरान एसआईटी ने नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। हॉटमिक्स प्लांट का निरीक्षण कर अनियमितताएं देखीं।

फाइलें और दस्तावेज अभी तक नहीं मिले
इसी कड़ी में आउटसोर्स कर्मियों की भर्ती और उनके वेतन में धांधली के अलावा नगर निगम की खरीद-फरोख्त की कई शिकायतों के अलावा कुछ पार्षदों के भी नाम सामने आए, लेकिन सिर्फ कागजों पर। आज भी लोग अपनी शिकायतें पुलिस को भेज रहे हैं और बयान तक देने आ रहे हैं, लेकिन कार्रवाई है कि कागज से बाहर ही नहीं निकल रही है। एसआईटी का तर्क है कि नगर निगम जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। कुछ फाइलें और दस्तावेज मांगे गए हैं, जो अभी तक नहीं मिले हैं। इससे भी जांच बाधित हो रही है।

पुलिस पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं है। एसआईटी अपना काम कर रही है। कुछ फाइलें नगर निगम से मिलना बाकी है। इसके बाद पूरी रिपोर्ट एंटी करप्शन और विजिलेंस को भेज दी जाएगी।  -रघुबीर लाल, पुलिस कमिश्नर
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नगर निगम की ओर से की गई कार्रवाई
भ्रष्टाचार की शिकायतें बढ़ीं तो नगर निगम भी हरकत में आया और कानूनी के बजाय विभागीय कार्रवाई शुरू की। फर्मों के पंजीकरण मामले में निगरानी न करने और बिना सत्यापन पंजीकरण करने के आरोप में अभियंत्रण विभाग के वरिष्ठ लिपिक और दो जेई को निलंबित कर पल्ला झाड़ा। उन पर किसी तरह की जांच नहीं बैठाई। इसके अलावा तीन लिपिकों को इधर से उधर करने की खानापूर्ति की। हालांकि, सीडीओ की जांच टीम की रिपोर्ट पर मंडलायुक्त ने मुख्य अभियंता के स्थानांतरण और विभागीय जांच के लिए शासन को पत्र जरूर लिखा है।
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