नगर निगम में कुल 400 पंजीकृत ठेकेदार हैं
खास तौर पर अभियंत्रण विभाग के अधिकारी और कर्मचारी फाइलें जांचने में लगे रहे। बता दें कि नगर निगम में कुल 400 पंजीकृत ठेकेदार हैं। इसमें से 27 हॉट मिक्स प्लांट से जुड़े हैं। नियमानुसार, हॉट मिक्स प्लांट से जुड़े हर ठेकेदार के पास अपना प्लांट होना चाहिए। नगर निगम के यह ठेकेदार आपस में सिंडीकेट बनाकर एक ही प्लांट से काम कर रहे हैं।
मामले में ब्लैक लिस्ट व एफआईआर कराने की तैयारी
रविवार और सोमवार जब इन ठेकेदारों के बताए गए प्लांट पर नगर निगम अधिकारी पहुंचे, तो कई जगह प्लांट के बाहर ताला मिला। कुछ ठिकानों पर प्लांट ही खराब मिले। अब जांच हो रही है कि अगर प्लांट होना जरूरी है तो बिना प्लांट के यह ठेकेदार कैसे पंजीकृत हो गए। इन ठेकेदारों के खिलाफ गलत सूचना देकर पंजीकरण कराने और सिंडीकेट बनाकर कार्य करने के मामले में ब्लैक लिस्ट व एफआईआर कराने की तैयारी है।
प्लांट पर मिला ताला तो सरेंडर हो गए ठेकेदार
रविवार को भौंती, किदवईनगर समेत शहर के अलग-अलग स्थानों पर ठेकेदारों के प्लांट पर जब नगर निगम अधिकारी पहुंचे तो उन्हें तमाम खामियां मिली। किदवईनगर में ठेकेदार फर्म अजय इंटरप्राइजेज के प्लांट के गेट पर ताला मिला। इस पर ठेकेदार अजय कुमार वाजपेयी ने नगर निगम के मुख्य अभियंता को पत्र देकर कहा है कि मेरा प्लांट नए स्थान पर शिफ्ट हो रहा है। शिफ्ट होने तक प्लांट का पंजीकरण निरस्त माना जाए। इसके अलावा, दूसरे ठेकेदार भी अपने कागजात लेकर नगर निगम मुख्यालय पहुंचे।
सुबह से देर रात तक चला बैठकों का दौर
नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने सोमवार सुबह करीब आठ बजे अपने कार्यालय में अभियंत्रण विभाग से जुड़े अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने पिछले तीन वर्षों का डाटा मांगा। कहा कि 15 वें वित्त आयोग के तहत किस-किस ठेकेदार ने कौन-कौन सा कार्य किया, उसका डाटा बनाएं। नाला सफाई और अन्य विकास कार्य की सूची बनाने के निर्देश दिए। सूत्रों के अनुसार, नगर आयुक्त की बैठक के बाद इंजीनियरिंग से जुड़े अधिकारी एक जगह एकत्र होकर रणनीति बनाते रहे। नगर आयुक्त की बैठकों का दौर देर रात तक चलता रहा।
यह था मामला
दो दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नगर निगम की कार्यप्रणाली में चली आ रही धांधली के मामले में अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई थी। टेंडर प्रक्रिया को अपने हिसाब से चलाने, नए ठेकेदारों को नगर निगम में घुसने न देने समेत शहरभर से अनधिकृत रूप से वसूली पर क्लास लगाई थी।
कई शिकायतें पहुंची थी
छह बागी पार्षद लगातार नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे हैं। इसके अलावा, झांसी के एक ठेकेदार ने ठेके में गड़बड़ी करने, एक ठेकेदार का पंजीकरण न होने देने की शिकायत की थी। नए ठेकेदारों की एंट्री में माफियागिरी और वसूली व 15वें वित्त आयोग से मिले 300 करोड़ रुपये में मनमानी के आरोप लग रहे थे। यह सभी मामले सीएम तक पहुंचे जिस पर उन्हें सख्त टिप्पणी करनी पड़ी।