नोटिस जारी कर जवाब तलब भी किया गया
मजदूरों को काम देने का आधिकारिक दस्तावेज होता है, उसे शून्य करने के पीछे कई कारण होते हैं। जिसमें गड़बड़ियों को छिपाने के लिए रिकॉर्ड मिटाना, काम शुरू न होने पर बाद में फर्जी हाजिरी दिखाकर भुगतान निकालना होता है। जिले में एक ही फोटो से कई दिनों तक मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाने का खेल पकड़ा गया था। इसमें पांच सचिवों को नोटिस जारी कर जवाब तलब भी किया गया था।
वर्षों से चली आ रही अनियमितताओं पर लगेगी रोक
इसको लेकर शासन ने नए नियम जारी किए हैं। अब हाजिरी प्रकि्रया को पूरी तरह डिजिटल कर दी गई है। अब नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) के जरिए मजदूरों की उपस्थिति दर्ज होगी। इसमें जियो टैग फोटो, फेस ऑथेंटिकेशन, आइरिश पहचान जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे फर्जीवाड़े की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी। शासन का मानना है कि इससे योजना में पारदर्शिता आएगी और वर्षों से चली आ रही अनियमितताओं पर रोक लगेगी।
बिना अनुमति मस्टररोल शून्य करना अब आसान नहीं होगा और हर कार्रवाई की जवाबदेही तय होगी। इससे वास्तविक जरूरतमंद मजदूरों तक योजना का लाभ पहुंचाने का रास्ता भी साफ होगा। -चंद्रभान कनौजिया, उपायुक्त मनरेगा