कानपुर शहर से फ्लाइट सेवा फिर शुरू करने के लिए पहली बार एयरपोर्ट एडवाइजरी कमेटी (हवाई अड्डा सलाहकार समिति) के गठन की तैयारी चल रही है। कमेटी के गठन के बाद फ्लाइट सेवा से संबंधित निर्णय आसानी से लिए जा सकेंगे। इसके लिए भारतीय विमानपत्तन मुख्यालय प्राधिकरण निगमित मुख्यालय (नई दिल्ली) ने हरी झंडी दे दी है। समिति के गठन की जिम्मेदारी जिलाधिकारी को दी गई है। यह समिति हवाई यात्रा सुविधा के प्रसार की दिशा में काम करेगी।
एयरपोर्ट डायरेक्टर जमील खालिक ने बताया कि मुख्यालय से आए निर्देश के क्रम में कमेठी गठित की जा रही है। इससे उड़ान, विस्तार में आने वाली समस्याओं और नई रणनीति पर चर्चा हो सकेगी। कमेटी के अध्यक्ष कानपुर नगर के सांसद होंगे। इनकी गैरमौजूदगी में विधायक (एयरपोर्ट क्षेत्र विधानसभा) वैकल्पिक अध्यक्ष रहेंगे। कमेटी के संयोजक एयरपोर्ट अथारिटी के डायरेक्टर होंगे। भारतीय विमानपत्तन मुख्यालय प्राधिकरण निगमित मुख्यालय (नई दिल्ली) के निर्देश में अधिकतम तीन व्यक्ति सलाहकार समिति के सदस्य के रूप में नामित होंगे। इसमें व्यापार, उद्योग, एयरलाइंस, होटल संघ, टूर एंड ट्रैवेल्स और टैक्सी एसोसिएशन से संबंधित लोग शामिल हैं। इन क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों का अनुमोदन जिलाधिकारी, समिति के अध्यक्ष (सांसद ) से करेंगे। एयरपोर्ट एडवाइजरी कमेटी की बैठक में एयरपोर्ट के विकास, सुविधाओं संबंधी एजेंडे तय होंगे। क्या सुविधा उपलब्ध है, उसकी क्वालिटी क्या है, क्वालिटी ठीक है या नहीं, और क्या सुधार व सुविधाओं की जरूरत है आदि पर विचार-विमर्श होगा। इसकी समीक्षा कमेटी के अध्यक्ष (सांसद) करेंगे। निश्चित समय पर होने वाली बैठक में चर्चा के बाद अंतिम मुहर लगेगी।
फायदे का सौदा होने पर ही दौड़ेगी मेट्रो
कानपुर शहर में मेट्रो की जरूरत का नए सिरे से आकलन किया जाएगा। पहले चरण में आईआईटी से लेकर बेनाझाबर तक के रूट पर मेट्रो दौड़ाने के फायदे-नुकसान की गणित लगाई जाएगी। फायदे का सौदा होने के बाद ही इसे धरातल पर उतारा जाएगा। सोमवार को केडीए वीसी के. विजयेंद्र पांडियन ने कहा कि इसके लिए जल्द ही नया सर्वे शुरू कराया जाएगा।
दरअसल केंद्र सरकार की नई मेट्रो नीति में तीन मानकों पर खरा उतरने के बाद ही मेट्रो प्रोजेक्ट को साकार करने की अनुमति दी गई है। इनमें सबसे पहले मेट्रो प्रोजेक्ट को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर अमली जामा पहनाना है। इसका मतलब यह हुआ कि अब मेट्रो के लिए लोन की बजाय केडीए को निवेशक की तलाश करनी पड़ेगी। मेट्रो की शहर में जरूरत कितनी है और मेट्रो चलाने पर कम से कम 18 फीसदी का लाभ होने की अनिवार्यता का मानक भी तय किया गया है। केडीए वीसी ने कहा कि मेट्रो प्रोजेक्ट की नए सिरे से डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कराई जाएगी। इसमें सभी बिंदुओं को समाहित किया जाएगा।
फिलहाल तो अधर में
बीते साल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वोटों की फसल काटने के लिए शुरू किया गया मेट्रो प्रोजेक्ट फिलहाल तो अधर में लटकता दिख रहा है। कार्यदायी संस्था लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन 50 करोड़ रुपये से मेट्रो के नाम पर पॉलीटेक्निक में मेट्रो यार्ड व बाउंड्री वॉल का काम शुरू करा चुका है। पहले तैयार की गई डीपीआर के लिए केडीए ने 3.5 करोड़ रुपये डीपीआर के लिए दिए थे। यह सारी कवायद अब फिर नए सिरे से होगी। इसे काम लटकना तय है।