बची-खुची पूंजी समेटकर लखनऊ भागे
इसके बाद उसे हैलट अस्पताल रेफर कर दिया। उसके पिता मनोज और चाचा शुभम के साथ हैलट लेकर पहुंचे। इंद्रबाबू ने बताया कि डॉक्टरों ने बच्ची को तुरंत हटाने को कह दिया। दलील दी कि बच्ची से अन्य बच्चों को संक्रमण फैल जाएगा। एंबुलेंस का किराया और बची-खुची पूंजी समेटकर लखनऊ भागे।
ऑपरेशन की तत्काल व्यवस्था नहीं है
केजीएमयू में पर्चा बनवाया और भर्ती कराने पहुंचे, तो जवाब मिला कि वेंटिलेटर खाली नहीं है वापस ले जाओ। उसे लेकर राम मनोहर लोहिया अस्पताल गए। वहां भी समस्या जानने के बाद कहा गया कि विशेषज्ञ नहीं है एसजीपीजीआई ले जाओ। पीजीआई पहुंचे, तो कहा गया कि यहां इस तरह के ऑपरेशन की तत्काल व्यवस्था नहीं है।
फ्लाईओवर के नीचे जमीन पर ही बैठ गए
छह महीने बाद लेकर आना। चारों तरफ से निराश होकर हमीरपुर के लिए निकले, लेकिन रास्ते में कानपुर के जेके चौराहे पर आकर हिम्मत ने साथ छोड़ दिया और फ्लाईओवर के नीचे जमीन पर ही बैठ गए। सोमवार को ही वह उसे लेकर हमीरपुर पहुंचे जहां बच्ची की मौत हो गई।
इस तरह का मामला पता चला है। हम भी जांच कर रहे हैं कि बच्ची कब आई थी। अभी कुछ पता नहीं चला है। हमारे यहां दो पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. आरके त्रिपाठी और डॉ. श्रद्धा वर्मा हैं। सर्जरी भी बच्चों की इस तरह की होती है। हम जांच कर रहे हैं कि बच्ची कब आई थी। -डॉ. शैलेंद्र गौतम, विभागाध्यक्ष बाल रोग