कर आरोपण और नोटिस व्यवस्था में पारदर्शिता
परिपत्र संख्या 258 के जरिए कर अधिकारियों की मनमानी पर अंकुश लगाने की कोशिश की गई है। अब कारण बताओ नोटिस में केवल कानून की धाराएं लिखना काफी नहीं होगा, बल्कि टैक्स मांगने के ठोस साक्ष्य और आधार बताने होंगे। यदि धोखाधड़ी या जानबूझकर तथ्य छिपाने का आरोप है, तो उसे साक्ष्य सहित स्पष्ट करना होगा। विभाग को अनुमान और संदेह के आधार पर कार्रवाई करने के बजाय तर्कसंगत आदेश पारित करने होंगे।
डेमो कारों पर आईटीसी और निर्यातकों को बड़ी राहत
ऑटोमोबाइल सेक्टर को बड़ी राहत देते हुए परिपत्र संख्या 262 के माध्यम से स्पष्ट किया गया है कि कार शोरूम के पास मौजूद डेमो कारों पर अब इनपुट टैक्स क्रेडिट अनुमन्य होगी। वहीं, निर्यात (जीरो रेटेड) के मामलों में परिपत्र संख्या 263 के तहत विदेशी मुद्रा के स्थान पर अन्य मान्य रुपये वाले खातों में भुगतान मिलने या आयात भुगतान से राशि समायोजित होने पर भी निर्यात की शर्त पूरी मानी जाएगी। इसके अलावा, बहुचर्चित नियम 96(10) को हटाए जाने का लाभ 23 अक्टूबर 2017 से दिए जाने के कारण पुराने रिफण्ड विवादों में फंसे कारोबारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।