एक्सप्रेसवे की संरचना और टोल व्यवस्था
इस एक्सप्रेसवे में लखनऊ से बनी तक 18 किलोमीटर का हिस्सा एलिवेटेड है। इसके आगे से आजादनगर, शुक्लागंज (उन्नाव) तक का शेष भाग नए सिरे से निर्मित है। इसमें सड़क पर नवाबगंज की तरह कोई टोल प्लाजा नहीं होगा बल्कि पांच स्थानों पर प्रवेश और निकास मार्ग बनाए गए हैं। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर सभी प्रवेश और निकास स्थलों पर टोल प्लाजा बनाए गए हैं। प्रवेश करते समय फास्टैग से एंट्री होगी और निकास द्वार पर टोलटैक्स कट जाएगा।
निर्माण में विलंब और गति सीमा
इस एक्सप्रेसवे का निर्माण शिलान्यास के दौरान तय समय सीमा के अनुसार जून 2025 तक पूरा होना था। हालांकि, 43 गांवों की जमीन अधिग्रहण और विद्युत ग्रिड की लाइन शिफ्टिंग में देरी के कारण इसमें विलंब हुआ। एनएचएआई ने अब निर्माण पूरा होने का दावा किया है। इस परियोजना से यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी।
63 सीसीटीवी कैमरे, 120 किमी से ज्यादा रफ्तार पर कटेंगे चालान
64 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे में 63 सीसीटीवी कैमरे और 16 वीडियो डिटेक्शन इंसीडेंट सिस्टम नजर आएंगे। इस सिस्टम के माध्यम से हादसा होने पर तत्काल कंट्रोल रूम तक सूचना पहुंचेगी। कंट्रोल रूम से ही पूरे एक्सप्रेसवे पर नजर रखी जाएगी। दावा है कि हादसा होने पर 15 मिनट में राहत दल मौके पर पहुंच जाएगा। 120 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा रफ्तार से वाहन चलाने पर चालान के लिए एटीएमएस भी लगाए गए हैं।