लीज डीड की शर्तों के अनुसार संस्था को मानचित्र स्वीकृत कराकर एक वर्ष में यह निर्माण कराना था, लेकिन इन शर्तों का अनुपालन नहीं किया गया, बल्कि सोसाइटी ने 1963 में यह प्लॉट आयुर्वेदिक विद्यालय को हस्तांतरित कर दिया। विद्यालय के निर्माण तथा संचालन के लिए प्राधिकरण ने तीन बार मानचित्र स्वीकृत कर पर्याप्त अवसर दिए, पर संस्था ने विद्यालय का निर्माण कराया और न ही नियमानुसार विद्यालय का संचालन किया गया। केडीए उपाध्यक्ष के अनुसार लीज डीड की शर्तों का उल्लंघन और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन करते हुए प्राधिकरण आयुर्वेदिक विद्यालय की लीज डीड निरस्त की। प्राधिकरण का दस्ता तड़के ही मौके पर पहुंचा और जमीन का कब्जा लिया। सर्वे कराकर प्लॉट के चारों तरफ बाउंड्रीवाल निर्माण शुरू किया। प्राधिकरण स्वामित्व के बोर्ड भी लगाए।
नंबर गेम
450 करोड़ कीमत है खाली कराई गई जमीन की
740 करोड़ की जमीनें पांच दिनों में केडीए ने कब्जाई
जो कोई भी प्राधिकरण के स्वामित्व की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा या हड़पने का प्रयास करेगा या सस्ती दर पर पूर्व में किसी जन उपयोगी कार्य के लिए दी गई जमीन पर शर्तों के विपरीत व्यक्तिगत लाभ के लिए व्यवसायिक कार्य करेगा, उसके खिलाफ केडीए नियमानुसार कड़ी कार्यवाही करेगा।- अरविंद सिंह, उपाध्यक्ष, केडीए
10 माह मे खाली कराई 1000 करोड़ की जमीन
केडीए उपाध्यक्ष अरविंद सिंह ने अपने 10 महीने के कार्यकाल में विभिन्न क्षेत्रों में स्थित प्राधिकरण स्वामित्व की लगभग 1000 करोड़ रुपये जमीनें अवैध कब्जों, अतिक्रमण से मुक्त कराईं और उनका कब्जा लिया। मात्र पांच दिन में स्वरूप नगर, हरिहरनाथ शास्त्री नगर एक्सटेंशन और किदवई नगर में लगभग 43947 वर्गमीटर जमीन का कब्जा लिया, जिसकी अनुमानित कीमत 740 करोड़ है।