जांघ की नस से दिमाग तक पहुंचेगा स्टेंट, ब्लीडिंग का खतरा होगा कम
डॉ. तेजस राव ने कार्यशाला में बताया कि यदि किसी मरीज को अचानक ब्रेन स्ट्रोक आ जाए या दिमाग की नस में खून का थक्का जम जाए, तो पारंपरिक ओपन सर्जरी के बजाय जांघ के पास की नस के जरिए स्टेंट डाला जा सकता है। इस आधुनिक विधा से सीधे दिमाग तक पहुंचकर जमा हुआ थक्का आसानी से हटाया जा सकता है। उन्होंने यह भी समझाया कि यदि दिमाग की कोई नस फट गई हो तो उसे कैसे सुरक्षित तरीके से जोड़ा जाता है।
ट्यूमर के दौरान स्टंटिंग तकनीक से मरीज को मिलेगी जल्द राहत
कार्यशाला में ब्रेन ट्यूमर के सफल और सुरक्षित ऑपरेशन की तकनीक पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि स्टंटिंग तकनीक के जरिए ट्यूमर को रक्त सप्लाई करने वाली नस को पहले ही ब्लॉक कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया से ऑपरेशन के दौरान मरीज का खून बहुत कम बहता है, जिससे सर्जरी का जोखिम काफी घट जाता है और मरीज रिकवरी के बाद तेजी से स्वस्थ होकर घर लौट सकता है।