जाजमऊ, गंगा बैराज समेत पांच जगहों से होगी शुरुआत
उन्होंने प्रदूषित पानी को लेकर आईआईटी कानपुर की सर्वे रिपोर्ट ली है। उसी आधार पर शुरुआत जाजमऊ, गंगा बैराज समेत पांच जगहों से की जाएगी। उन्होंने बताया कि पानी को फिल्टर से छानने के अलावा इंटरफेशियल हीटिंग सिस्टम का भी उपयोग किया जाएगा। इसमें नैनो पार्टिकल्स को गर्म कर पानी वाष्पीकृत किया जाएगा और फिर उसे इकट्ठा कर इस्तेमाल किया जाएगा।
शुद्धीकरण के लिए कार्बन का किया जाता है इस्तेमाल
इससे पानी डिस्टिल्ड वाटर की तरह शुद्ध होगा। यह प्रणाली सौर ऊर्जा से चलेगी और बिजली की आवश्यकता नहीं होगी। प्रोफेसर शुक्ला ने बताया कि पानी को छानने के लिए ग्राफीन, लेड, मर्करी और आर्सेनिक फिल्टर तैयार किए गए हैं। पानी के शुद्धीकरण के लिए कार्बन का इस्तेमाल किया जाता है। ये फिल्टर औद्योगिक अपशिष्ट युक्त पानी को भी साफ करने में सक्षम हैं।
सीवी रमन प्रोजेक्ट के तहत हो रही जांच
सीएसजेएमयू के केमिस्ट्री विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. इंद्रेश कुमार शुक्ला ने बताया कि सीवी रमन प्रोजेक्ट के तहत शहर के पानी की गुणवत्ता की जांच शुरू की जा रही है। जाजमऊ क्षेत्र के पानी के सैंपल की जांच आईआईटी मुंबई की लैब में की गई जिसमें लेड की मात्रा पाई गई। यह औद्योगिक प्रदूषण का परिणाम है जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इसके अलावा पानी में टीडीएस की मात्रा भी अधिक पाई गई है। अब विभिन्न क्षेत्रों से सैंपल लेकर विस्तृत जांच और शुद्धिकरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
मुफ्त देंगे फिल्टर मशीनें
प्रोजेक्ट के तहत अधिक खराब पानी की स्थिति वाले इलाकों में मुफ्त मशीनें दी जाएंगी। इसमें नैनो मेटेरियल फिल्टर लगे रहेंगे। ये फिल्टर पानी में मिश्रित धातु तत्वों को साफ कर देंगे। इससे लोगों को साफ पानी मिल सकेगा। इसके साथ ही अधिक टीडीएस वाले पानी से होने वाले रोगों से भी बचे रहेंगे। नैनो मेटेरियल फिल्टर सस्ते तैयार हो जाते हैं। इसके लिए जो मशीनें बनी हैं वे बहुत महंगी होती हैं। उनके दाम करोड़ों में होते हैं।