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IMA Action: फिजीशियन-पैथोलॉजिस्ट कैसे कर सकते हैं सर्जरी? आईएमए ने आहूजा दंपती की गिरफ्तारी पर बुलाई आपात बैठक

Wed, 01 Apr 2026 01:50 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: अवैध किडनी कांड में डॉ. प्रीति और डॉ. सुरजीत आहूजा की गिरफ्तारी के बाद आईएमए ने जांच कमेटी बनाई है। एसोसिएशन का कहना है कि सर्जन न होने के बावजूद प्रत्यारोपण में उनकी भूमिका की गहन जांच होगी।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में अनाधिकृत किडनी प्रत्यारोपण के मामले में फिजीशियन डॉ. प्रीति आहूजा और उनके पैथोलॉजिस्ट पति डॉ. सुरजीत आहूजा की गिरफ्तारी के बाद आईएमए ने आपात बैठक बुलाई। इसमें विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श के बाद जांच कमेटी गठित की गई। यह तय हुआ कि सारे तथ्यों को परखने, डॉ. प्रीति से बाद करने पर सत्य पता किया जाएगा। इसके बाद एक्शन लिया जाएगा। एसोसिएशन ने अपने नेशनल हेडक्वार्टर को इस संबंध में सूचित कर निर्देश मांगे हैं।

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परेड स्थित आईएमए भवन में हुई बैठक में कहा गया कि अभी इस मामले में डॉ. प्रीति आहूजा और डॉ. सुरजीत से किसी की बात नहीं हुई। आईएमए अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा ने बताया कि बुधवार या गुरुवार को वह उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति से मिलेंगे। इसके साथ ही प्रशासन से भी इस प्रकरण की ब्योरा मांगा गया है। आईएमए के पास अभी प्रकरण के संबंध में जानकारी नहीं है। सत्यता का पता करने के बाद एक्शन तय किया जाएगा। इसके साथ ही नेशनल हेडक्वार्टर से भी निर्देश आएंगे।

डॉ. प्रीति फिजीशियन है और डॉ. सुरजीत पैथोलॉजिस्ट हैं
जांच कमेटी में एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. मेहरोत्रा और सचिव डॉ. शालिनी मोहन हैं। कमेटी प्रकरण में आंतरिक जांच करेगी। डॉ. शालिनी ने कहा कि प्रकरण का निष्कर्ष आ जाए और वे दोषी पाए जाते हैं तो जो कानूनन सही होगा वही एक्शन लिया जाएगा। डॉ. प्रीति फिजीशियन है और डॉ. सुरजीत पैथोलॉजिस्ट। इनमें कोई सर्जन नहीं है। ये दोनों ही किडनी प्रत्यारोपण नहीं कर सकते। बैठक में पूर्व आईएमए अध्यक्ष डॉ. नंदिनी रस्तोगी, डॉ. पंकज गुलाटी और अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

हॉस्पिटल से बरामद माल और दस्तावेज - फोटो : amar ujala
हो सकती है ये सजा
किडनी कांड रैकेट के आरोपियों पर मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 की धारा 18, 19, 20 एवं बीएनएस की 143 और 3 ( 5 ) की धाराएं लगाई गई हैं। धारा 18 अवैध रूप से मानव अंग निकालने से संबंधित है। इसमें 10 साल तक की कैद और 20 लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। धारा 19 में इसमें किसी को मानव अंग देने के लिए रजामंद करने पर दस साल तक की सजा और एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।
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लाइसेंस भी हो सकता है रद्द
धारा 20 में पांच साल तक की सजा या 20 लाख तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। मेडिकल प्रोफेशनल (डॉक्टर आदि ) शामिल होने पर उनका लाइसेंस भी रद्द हो सकता है। वहीं बीएनएस की धारा 143 में एक से अधिक व्यक्तियों का दुर्व्यापार करने वाले को उम्र कैद और जुर्माना से भरना पड़ सकता है। धारा 3 ( 5 ) सामूहिक आपराधिक दायित्व को बताती है।
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