आईआईटी के प्रो. डीपी मिश्रा ने बताया कि अब भारत में जो भी ताप विद्युत गृह बन रहे हैं, वे सुपर क्रिटिकल तकनीक पर आधारित होंगे। इस तकनीक के प्रयोग से एक यूनिट बिजली बनाने में सिर्फ 560 ग्राम कोयला ही खर्च होगा। कोयले की कम से कम खपत में ज्यादा बिजली उत्पादन करना वैज्ञानिकों का उद्देश्य है। साथ ही इस तकनीक से बिजली की ट्रिपिंग समस्या से भी निजात मिल पाएगी।
प्रो. मिश्रा ने बताया कि इन पांच दिनों में यहां आने वाले सभी प्रोफेसरों को सुपर क्रिटिकल पावर तकनीक पर विद्युत उत्पादन हेतु प्रशिक्षण दिया जाएगा। जो देश में गुणवत्तापूर्ण विद्युत उत्पादन एवं वितरण के लिए कारगर साबित होगा।
सुपर क्रिटिकल तकनीक पर बनेगा पनकी ताप विद्युत गृह
इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स के सचिव और पनकी ताप विद्युत गृह के अधीक्षण अभियंता विवेक अस्थाना ने बताया कि पनकी थर्मल पावर प्लांट की 220 मेगावाट की यूनिट सब क्रिटिकल तकनीक पर आधारित थी। इससे प्रदूषण भी अधिक फैलता था। अब 660 मेगावाट की नई यूनिट सुपर क्रिटिकल पावर जनरेशन तकनीक पर तैयार की जाएगी।