90 सेकेंड में मिट्टी के 12 पोषक तत्वों की जानकारी देने वाला आईआईटी कानपुर का भू-परीक्षक उपकरण अब विदेशों में भी मिट्टी की जांच कर रहा है। देश के भी कई राज्यों में इस उपकरण से जांच हो रही है। भू-परीक्षक से थाईलैंड, मॉरीशस समेत छह अन्य देशों में भी जांच की जा रही है। आईआईटी की इस तकनीक को मार्केट में उतारने वाली कंपनी का दावा है कि यह उपकरण 12 महीने में 21 देशों की मिट्टी की जांच करेगा।
किसानों को कम समय में मिट्टी की गुणवत्ता बताने वाले इस उपकरण को आईआईटी कानपुर के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. जयंत कुमार सिंह ने तैयार किया है। पहले उन्होंने भू-परीक्षक-1 डिवाइस तैयार की थी जिसमें सात तरह के तत्वों के बारे में जानकारी मिलती थी। बाद में भू-परीक्षक-2 डिवाइस तैयार की है। इसमें मिट्टी की पांच जांचें होती हैं। इस डिवाइस की मदद से किसान मिट्टी की जांच करने के बाद ही फसलों की बुआई करते हैं। उपकरण में जांच के लिए खेत की पांच ग्राम मिट्टी की जरूरत होती है। उपकरण की मदद से नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम, ईसी, आर्गेनिक कार्बन, क्ले कंटेट, जिंक, मैग्नीज, कॉपर, सल्फर, बोरोन और आयरन जांचें हो जाती है। रिपोर्ट किसानों के मोबाइल पर आती है।
आईआईटी ने ही कॉमर्शियल उपयोग के लिए भू-परीक्षक-2 की तकनीक का लाइसेंस एक निजी कंपनी को दिया है। इसके बाद कंपनी ने इसका निर्माण कामर्शियल प्रयोग के लिए किया। आईआईटी से भू-परीक्षक की तकनीक को बाजार तक पहुंचाने वाली कंपनी के फाउंडर रजतवर्धन ने बताया कि थाईलैंड, रवांडा, तंजानिया, कैमरून, जाम्बिया और केन्या में भू-परीक्षक अपनी सेवाएं दे रहा है। हजारों किसान इससे लाभान्वित हैं। इसके अलावा देश कई राज्यों के किसान भी भू-परीक्षक का लाभ ले रहे हैं।